अरुणाचल के कीवी का वैश्विक धमाका, ₹167 करोड़ के विशेष मिशन का आगाज

केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंदिया ने नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम के दौरान ‘अरुणाचल कीवी’ मिशन की शुरुआत की। लगभग 167 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत वाला यह मिशन पूरी तरह से उत्पादक आधारित दृष्टिकोण पर तैयार किया गया है।

इसका मुख्य उद्देश्य अरुणाचल प्रदेश के कीवी उत्पादकों को केवल आधुनिक खेती की तकनीकों से जोड़ना है, बल्कि उनके उत्पादों की मूल्य एकीकृत, ब्रांडिंग और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच को भी सुगम बनाना है। यह मिशन क्षेत्र के किसानों के लिए आर्थिक समृद्धि के नए द्वार खोलने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

लॉन्च कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ने सिंदिया ने कहा कि इस व्यापक योजना में मेघालय का अदरक, नगालैंड की कॉफी, सिक्किम की जैविक खेती, मणिपुर की भूरी विरासत, असम का मूगा रेशम और मेघालय की लाकाडोंग हल्दी जैसे उत्पादों को उनकी सांस्कृतिक और भौगोलिक कॉफी के आधार पर चिन्हित किया गया है।

‘अरुणाचल कीवी’ मिशन इसी श्रृंखला का हिस्सा है, जो पूर्वोत्तर की विविधता और कृषि क्षमता को दुनिया के सामने पेश करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने आगे बताया कि यह महत्वाकांक्षी पहल मुख्य रूप से चार मजबूत स्तंभों पर केंद्रित है, जिनमें आपसी समन्वय, मूल्यवर्धन (वैल्यू एडिशन), ब्रांडिंग और बाजार एकीकरण शामिल हैं।

सरकार का लक्ष्य केवल उत्पादन बढ़ाना मात्र नहीं है, बल्कि एक ऐसी प्रतिस्पर्धी मूल्य श्रृंखला तैयार करना है जो वैश्विक मानकों पर खरी उतरे। आधुनिक बुनियादी ढांचे और संगठित फार्मिंग क्लस्टर्स के माध्यम से कीवी उत्पादन को एक बड़े उद्योग के रूप में विकसित किया जाएगा। इससे स्थानीय किसानों को न केवल बेहतर प्रशिक्षण मिलेगा, बल्कि उन्हें सीधे बड़े बाजारों से जोड़कर बिचौलियों के प्रभाव को भी कम किया जाएगा।

गौरतलब है कि अरुणाचल प्रदेश वर्तमान में भारत का सबसे बड़ा कीवी उत्पादक राज्य है। वर्ष 2020 में मिशन ऑर्गेनिक वैल्यू चेन डेवलपमेंट फॉर नॉर्थ ईस्टर्न रीजन के तहत जैविक कीवी प्रमाणन प्राप्त करने वाला यह देश का पहला राज्य भी बना था।

अब इस नए मिशन के माध्यम से बेहतर बुनियादी ढांचे और मजबूत बाजार संपर्कों के जरिए किसानों को सीधे सहायता पहुँचाई जाएगी। इस प्रयास का अंतिम लक्ष्य अरुणाचल के कीवी को घरेलू और विदेशी बाजारों में एक ‘प्रीमियम ब्रांड’ के रूप में स्थापित करना है, जिससे राज्य की पहचान एक प्रमुख फल निर्यातक के रूप में और मजबूत होगी।

निष्कर्ष: ‘अरुणाचल कीवी’ मिशन की शुरुआत पूर्वोत्तर भारत की कृषि क्षमता को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने और स्थानीय किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।

167 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी योजना के जरिए सरकार आधुनिक तकनीकों, ब्रांडिंग और बिचौलियों से मुक्त बाजार एकीकरण (मार्केट इंटीग्रेशन) पर ध्यान केंद्रित कर रही है, ताकि अरुणाचल के कीवी को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में एक ‘प्रीमियम ब्रांड’ के रूप में स्थापित किया जा सके।

देश का सबसे बड़ा कीवी उत्पादक होने के नाते, यह पहल न केवल राज्य को एक प्रमुख फल निर्यातक के रूप में मजबूत करेगी, बल्कि टिकाऊ और संगठित खेती के माध्यम से स्थानीय किसानों के लिए आर्थिक समृद्धि के नए रास्ते भी खोलेगी।

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