25 साल में बदला मौसम का मिजाज: आम, लीची, केला और सब्जियों पर बढ़ी जलवायु की चुनौती

25 साल में जलवायु परिवर्तन का आम, लीची, केला और सब्जियों की खेती पर प्रभाव

भारत की कृषि व्यवस्था में बागवानी अब केवल पूरक क्षेत्र नहीं, बल्कि किसानों की आय, पोषण सुरक्षा, रोजगार और कृषि-विविधीकरण का महत्वपूर्ण आधार बन चुकी है। वर्ष 2024–25 में देश का कुल बागवानी उत्पादन दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार 367.72 मिलियन टन रहा, जिसमें लगभग 114.51 मिलियन टन फल और 219.67 मिलियन टन सब्जियाँ शामिल … Read more

केले के पत्तों से भी कमाई का मौका: 5°C कोल्ड स्टोरेज और एथिलीन स्कैवेंजर से 30 दिन तक ताजगी

केले के पत्तों को 5°C कोल्ड स्टोरेज में एथिलीन स्कैवेंजर के साथ सुरक्षित रखने की तकनीक

भारत विश्व के प्रमुख केला उत्पादक देशों में है। सरकारी अंतिम अनुमानों के अनुसार वर्ष 2024–25 में देश में लगभग 9.48 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में 3.78 करोड़ टन केले का उत्पादन हुआ। वहीं मार्च 2026 में जारी केंद्र सरकार के अंतिम 2024–25 बागवानी अनुमानों में कुल बागवानी उत्पादन 370.74 मिलियन टन दर्ज किया गया। इतने … Read more

चक्रवात अर्णव से बिहार में फसल-बागवानी को नुकसान: जलभराव के बाद तुरंत करें ये 4 जरूरी काम

चक्रवात अर्णव के बाद बिहार में जलभराव से प्रभावित फसल और बागवानी

बिहार में सितंबर के अंतिम सप्ताह में चक्रवात अर्णव के प्रभाव से हुई तेज बारिश, आंधी और कई क्षेत्रों में जलभराव ने खरीफ फसलों, सब्जियों तथा फलदार फसलों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के 26 सितंबर के बुलेटिन में बिहार के लिए भारी वर्षा तथा गरज-चमक की चेतावनी … Read more

अर्णव चक्रवात की बारिश के बाद बागवान रहें सतर्क: पेड़ों को जलभराव से बचाएं, यूरिया और जुताई से करें परहेज

अर्णव चक्रवात की बारिश के बाद जलभराव से प्रभावित बाग और पेड़ों की जड़ें

सितंबर 2026 में देश के पूर्वी और उत्तरी हिस्सों में मौसम का मिजाज तेजी से बदला है। बंगाल की खाड़ी में बनी मौसम प्रणाली के कारण ओडिशा सहित कई क्षेत्रों में भारी वर्षा हुई। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 22 सितंबर को बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने अवदाब के गहरे अवदाब में बदलने … Read more

केले को बाजार भेजने से पहले करें ग्रेडिंग और APEDA पैकिंग: कोल्ड-चेन से बेहतर कीमत पाने का तरीका

केले की ग्रेडिंग और APEDA पैकिंग

केला ऐसी फल फसल है जिसमें उत्पादन के बाद की छोटी-सी लापरवाही भी किसान के लाभ को काफी कम कर सकती है। कटाई के बाद चोट, घर्षण, क्राउन रॉट, स्टेम-एंड रॉट, एन्थ्रेक्नोज, अधिक तापमान, खराब पैकिंग और असंगत परिवहन के कारण गुणवत्ता तेजी से गिरती है। राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के अनुसार केले में गलत पोस्ट-हार्वेस्ट … Read more

केले में पोटाश की कमी से 40% तक घट सकती है उपज? जानें पत्ती के लक्षण और वैज्ञानिक फर्टिगेशन

केले में पोटाश की कमी के पत्ती लक्षण और फर्टिगेशन

केला देश की प्रमुख फल फसलों में शामिल है। भारत में 2024-25 के उपलब्ध सरकारी अनुमानों के अनुसार लगभग 9.48 लाख हेक्टेयर क्षेत्र से 377.66 लाख टन केला उत्पादन हुआ, जो लगभग 39.84 टन प्रति हेक्टेयर की औसत उत्पादकता दर्शाता है। केले की अधिक उपज और बेहतर गुणवत्ता केवल अच्छी किस्म, सिंचाई और रोग प्रबंधन … Read more

केले का तना मोटा कैसे करें? जानिए वैज्ञानिक तरीके और सही पोषण प्रबंधन

केले का तना मोटा और मजबूत करने के लिए पोषण प्रबंधन

केले की व्यावसायिक खेती में किसान प्रायः पत्तियों के फैलाव, पौधे की ऊँचाई और घौद के आकार पर ध्यान केंद्रित करते हैं, किंतु पौधे की उत्पादन क्षमता का प्राथमिक संवाहक उसका आभासी तना (Pseudostem) होता है। वानस्पतिक दृष्टि से केला कोई काष्ठीय वृक्ष नहीं है; इसका स्यूडोस्टेम पत्तियों की सघन, संकेन्द्री पर्ण-म्यानों (Leaf Sheaths) के … Read more