भारत की खाद्य सुरक्षा लंबे समय से पानी की अधिक खपत करने वाली चावल और गेहूं की फसलों पर निर्भर रही है, जिनकी उत्पादकता अपनी सीमा के करीब पहुंच रही है। बढ़ती मांग और बढ़ते जल संकट के बीच मक्का एक टिकाऊ विकल्प के रूप में उभर कर सामने आ रहा है। कम पानी … [Read more...]
सुस्त आयात और रुपय की कमजोरी से तूर की कीमतों में हल्की तेजी..!
आयात में सुस्ती, नई फसल की आवक में देरी और रुपय की कमजोरी के चलते हाल के दिनों में तूर यानी अरहर के भाव में हल्की मजबूती देखने को मिली है। व्यापारिक सूत्रों के अनुसार, कमजोर मुद्रा के कारण विदेशी आपूर्ति महंगी पड़ी है, जबकि घरेलू बाजार में ताजा माल … [Read more...]
दक्षिण अमेरिका से आपूर्ति बढ़ने से वैश्विक तिलहन बाजार में नरमी..!
दक्षिण अमेरिका से रिकॉर्ड आपूर्ति की संभावनाओं और प्रमुख आयातकों की कमजोर मांग के बीच 2025 के अंत और 2026 की शुरुआत में वैश्विक तिलहन बाजारों पर दबाव साफ दिखाई दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय अनाज परिषद आईजीसी के अनुसार, नवंबर के अंत के बाद से सोयाबीन के … [Read more...]
दक्षिण अफ्रीका, पाकिस्तान और भारत के लिए बदल रहा है चीनी का बाजार..!
दक्षिण अफ्रीका ने चीनी आयात शुल्क तंत्र यानी डीबीआरपी की समीक्षा के लिए राजपत्र जारी किया है। यह कदम चीनी उत्पादकों द्वारा अधिक संरक्षण की मांग और पेय पदार्थ निर्माताओं द्वारा शुल्क कम करने की मांग के बीच परस्पर विरोधी आवेदनों के बाद उठाया गया है। … [Read more...]
वैश्विक खाद्य तेल बाजार में भारत का बड़ा फैसला और रमजान में बांग्लादेश को राहत..!
भारत ने दक्षिण अमेरिकी सोयाबीन तेल के 50,000 टन से अधिक के आयात को रद्द कर दिया है क्योंकि कमजोर रुपये और बढ़ती वैश्विक कीमतों के कारण आयात अव्यवहारिक हो गया था। ताड़ के तेल की तुलना में सोयाबीन तेल पर अधिक प्रीमियम के कारण खरीदार सस्ते उष्णकटिबंधीय … [Read more...]
वैश्विक चावल बाज़ार में भारत की वापसी से ब्राजील-पाकिस्तान के निर्यात में भारी उथल-पुथल..!
2025 में ब्राज़ील ने 15 लाख टन चावल का निर्यात किया, जिसकी मात्रा में 13 प्रतिशत की वृद्धि हुई, लेकिन मूल्य में 18 प्रतिशत की गिरावट आई और यह घटकर 457 मिलियन डॉलर रह गया। वैश्विक कीमतों में कमजोरी और भारतीय प्रतिस्पर्धा के कारण निर्यात प्रभावित हुआ। … [Read more...]
अब बुआई से नहीं रोपाई से बढ़ेगी 20 प्रतिशत तक अरहर की पैदावार..!
अंतरराष्ट्रीय अर्ध-शुष्क उष्णकटिबंधीय फसल अनुसंधान संस्थान इक्रिसॅट के अध्ययन से पता चला है कि अरहर यानी तुअर की सीधी बुवाई के बजाय पौध रोपण यानी ट्रांसप्लांटिंग अपनाने से पैदावार में 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की जा सकती है। तीन वर्षों तक चले इस शोध … [Read more...]






