किसानों के लिए गेहूं की कटाई का सही समय चुनना बहुत जरूरी होता है, क्योंकि यही आपकी मेहनत का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण चरण होता है। अगर इस समय थोड़ी भी गलती हो जाए, तो पूरे सीजन की मेहनत पर असर पड़ सकता है। इसलिए जरूरी है कि किसान सही संकेतों को समझें और सही समय पर कटाई करें।
सबसे पहले समझिए कि जल्दी कटाई करने का क्या नुकसान होता है। अगर आप फसल को पूरी तरह पकने से पहले काट लेते हैं, तो दाने कच्चे रह जाते हैं। ऐसे दाने सिकुड़े हुए होते हैं और उनका वजन भी कम होता है। इससे उत्पादन कम मिलता है और बाजार में भी सही दाम नहीं मिल पाता। इसके अलावा ऐसे गेहूं में नमी ज्यादा रहती है, जिससे भंडारण के समय फफूंद लगने का खतरा बढ़ जाता है।
अब अगर कटाई में ज्यादा देर कर दी जाए, तो भी नुकसान होता है। जब गेहूं पूरी तरह पककर खेत में ज्यादा दिन खड़ा रहता है, तो दाने झड़ने लगते हैं। तेज हवा चलने पर बालियां टूट सकती हैं और पक्षी भी दानों को नुकसान पहुंचाते हैं। कई बार अचानक बारिश हो जाती है, जिससे पूरी फसल खराब हो सकती है। इसलिए सही समय का चुनाव बहुत जरूरी है।
गेहूं की कटाई का सही समय पहचानने का सबसे आसान तरीका है दानों को जांचना। आप गेहूं का एक दाना लें और उसे दांत से दबाकर देखें। अगर दाना कड़क आवाज के साथ टूटता है, तो इसका मतलब है कि फसल तैयार है। अगर दाना दबाने पर नरम लगता है या मुड़ जाता है, तो अभी कुछ दिन इंतजार करना चाहिए। यह एक बहुत ही आसान और भरोसेमंद तरीका है, जिसे हर किसान अपने खेत में अपना सकता है।
दूसरा महत्वपूर्ण संकेत है दानों की नमी। जब फसल कटाई के लिए तैयार होती है, तब दानों में लगभग 14 से 15 प्रतिशत नमी होती है। अगर नमी इससे ज्यादा है, तो कटाई के बाद दाने जल्दी खराब हो सकते हैं। इसलिए अगर संभव हो तो नमी का ध्यान जरूर रखें। अगर दाने बहुत ज्यादा नरम लग रहे हैं, तो समझ लें कि अभी कटाई का समय नहीं आया है।
फसल का रंग भी कटाई का एक बड़ा संकेत देता है। जब गेहूं पूरी तरह पक जाता है, तो उसका रंग हरे से बदलकर सुनहरा या हल्का भूरा हो जाता है। खेत में अगर कहीं भी हरापन दिखाई दे रहा है, तो इसका मतलब है कि फसल अभी पूरी तरह तैयार नहीं हुई है। पूरी फसल का एक जैसा सुनहरा रंग होना चाहिए। बालियों की स्थिति भी बहुत कुछ बताती है।
जब दाने भर जाते हैं, तो बालियां भारी हो जाती हैं और नीचे की तरफ झुकने लगती हैं। अगर बालियां अभी सीधी खड़ी हैं, तो समझ लें कि फसल को थोड़ा और समय चाहिए। झुकी हुई बालियां इस बात का संकेत हैं कि दाने पूरी तरह भर चुके हैं। एक और आसान तरीका है तने की ऊपर वाली गांठ को जांचना। इसे हाथ से दबाकर देखें। अगर यह गांठ पूरी तरह सूख गई है और सख्त हो गई है, तो इसका मतलब है कि पौधे ने दानों को पोषण देना बंद कर दिया है और अब कटाई का सही समय है।
यह तरीका थोड़ा कम इस्तेमाल होता है, लेकिन काफी सही परिणाम देता है। मौसम का ध्यान रखना भी बहुत जरूरी है। कटाई हमेशा साफ और धूप वाले दिन में करनी चाहिए। अगर आसमान में बादल हों या बारिश की संभावना हो, तो कटाई को कुछ दिन के लिए रोक देना चाहिए। भीगी हुई फसल को काटने से दाने खराब हो सकते हैं और उनमें फफूंद लग सकती है।
इसलिए मौसम की जानकारी लेकर ही कटाई शुरू करें। कटाई के तरीके के अनुसार भी कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। अगर आप कम्बाइन हार्वेस्टर से कटाई कर रहे हैं, तो फसल पूरी तरह सूखी होनी चाहिए। अगर नमी ज्यादा होगी, तो मशीन सही से काम नहीं करेगी और दानों का नुकसान हो सकता है। वहीं अगर आप हाथ से कटाई कर रहे हैं, तो सुबह के समय हल्की नमी में कटाई करना अच्छा रहता है।
इससे दाने कम झड़ते हैं और नुकसान कम होता है। कटाई के बाद सबसे जरूरी काम होता है मड़ाई और भंडारण। मड़ाई हमेशा धूप में करनी चाहिए ताकि दाने पूरी तरह सूख जाएं। अगर दानों में नमी रह जाएगी, तो भंडारण के दौरान कीड़े और फफूंद लगने का खतरा बढ़ जाएगा। इसलिए दानों को अच्छी तरह सुखाना बहुत जरूरी है।
भंडारण के लिए साफ और सूखी जगह का चयन करें। जहां नमी न हो और हवा का अच्छा आवागमन हो। अगर संभव हो तो बोरियों में भरकर ऊंची जगह पर रखें ताकि जमीन की नमी का असर न पड़े। नीम की पत्तियों का उपयोग भी किया जा सकता है, जिससे कीड़े कम लगते हैं।किसान भाइयों, यह समझना जरूरी है कि सही समय पर कटाई करने से न केवल उत्पादन बढ़ता है, बल्कि गेहूं की गुणवत्ता भी अच्छी रहती है। अच्छी गुणवत्ता का अनाज बाजार में ज्यादा कीमत पर बिकता है, जिससे आपकी आमदनी बढ़ती है।
इसलिए जल्दबाजी या लापरवाही से बचें और सही समय पर सही निर्णय लें। अंत में यही कहना है कि गेहूं की कटाई कोई जल्दबाजी का काम नहीं है, बल्कि समझदारी का काम है। अगर आप ऊपर बताए गए संकेतों को ध्यान में रखेंगे, तो आप सही समय पर कटाई कर पाएंगे और अपनी मेहनत का पूरा लाभ उठा सकेंगे।
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