भारत आज विश्व का सबसे बड़ा केला उत्पादक देश है। विश्व के कुल केले उत्पादन का लगभग 26 से 27 प्रतिशत हिस्सा भारत से आता है तथा देश में प्रतिवर्ष लगभग 37 से 38 मिलियन टन केले का उत्पादन होता है। इसके बावजूद भारतीय किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार की तुलना में अपेक्षाकृत कम मूल्य प्राप्त होता है। इसका सबसे बड़ा कारण कटाई के बाद (Post-Harvest) होने वाली 20 से 30 प्रतिशत तक की क्षति, गुणवत्ता में कमी तथा वैज्ञानिक पैकिंग और उपचार का अभाव है।
आज घरेलू सुपरमार्केट, संगठित रिटेल और निर्यात बाजार केवल अच्छे आकार, चमकदार छिलके, रोग-मुक्त एवं लंबे समय तक सुरक्षित रहने वाले फलों को ही प्राथमिकता देते हैं। इसलिए केवल अच्छी खेती करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक पोस्ट-हार्वेस्ट प्रबंधन ही किसानों को अधिक लाभ दिलाने की कुंजी बन चुका है।
कटाई के तुरंत बाद क्या करें?
केले की कटाई के बाद सबसे पहले पूरे गुच्छे (Bunch) से फलों को सावधानीपूर्वक अलग-अलग हथ्थों (Hands) में विभाजित किया जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान फलों पर किसी प्रकार का दबाव या चोट नहीं लगनी चाहिए क्योंकि मामूली चोट भी बाद में काले धब्बों, सड़न और गुणवत्ता में कमी का कारण बनती है। कटाई के बाद फलों को सीधे धूप में रखने के बजाय छायादार स्थान पर ले जाना चाहिए ताकि उनकी प्राकृतिक नमी और ताजगी बनी रहे।
पहला चरण: फिटकरी के घोल से केले की धुलाई
हथ्थों को सबसे पहले फिटकरी (Alum) के घोल में डुबोया जाता है।
घोल तैयार करने की विधि
1 ग्राम फिटकरी प्रति 2.5 लीटर पानी में केले के हथ्थों को लगभग 3 मिनट तक घोल में डुबोएँ।
इस उपचार के प्रमुख लाभ
फल की सतह पर लगी गंदगी हटती है। लेटेक्स (दूध) एवं अन्य अशुद्धियाँ साफ हो जाती हैं। कीड़ों के मल एवं अन्य जैविक अवशेष हट जाते हैं। छिलके की प्राकृतिक सफाई होती है। प्रारंभिक सूक्ष्मजीवों की संख्या कम होती है। पैकिंग के समय फल अधिक आकर्षक दिखाई देते हैं। फिटकरी हल्के प्राकृतिक कीटाणुनाशक के रूप में भी कार्य करती है और फलों की स्वच्छता बढ़ाती है।
दूसरा चरण: Huwa-San से एंटीफंगल उपचार
फिटकरी उपचार के बाद केले के हथ्थों को दूसरे टैंक में Huwa-San के घोल में लगभग 3 मिनट तक डुबोया जाता है।
घोल बनाने की विधि
Huwa-San @ 1 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी, उदाहरण के लिए 250 मिलीलीटर Huwa-San, 250 लीटर पानी
(यदि 500 लीटर पानी का टैंक हो, तो लगभग 500 मिलीलीटर Huwa-San की आवश्यकता होगी। इसलिए मात्रा हमेशा पानी की वास्तविक क्षमता के अनुसार निर्धारित करें।)
Huwa-San क्या है?
Huwa-San एक उन्नत हाइड्रोजन पेरोक्साइड (Hydrogen Peroxide) एवं सिल्वर स्टेबलाइजेशन तकनीक पर आधारित शक्तिशाली बायोसाइड है। इसकी विशेषता यह है कि इसमें सिल्वर की विशेष स्थिरीकरण तकनीक के कारण हाइड्रोजन पेरोक्साइड अधिक समय तक सक्रिय रहता है और सामान्य हाइड्रोजन पेरोक्साइड की तुलना में अधिक प्रभावी ढंग से रोगजनकों को नियंत्रित करता है।
Huwa-San के प्रमुख लाभ
यह निम्नलिखित सूक्ष्मजीवों के विरुद्ध प्रभावी माना जाता है- बैक्टीरिया, कवक (Fungi), यीस्ट (Yeast), वायरस, फफूंद, बीजाणु (Spores), बायोफिल्म बनाने वाले सूक्ष्मजीव
इसके अतिरिक्त- दुर्गंध उत्पन्न नहीं करता। खाद्य पदार्थों के स्वाद एवं गंध को प्रभावित नहीं करता। पर्यावरण के अनुकूल है। उपयोग के बाद मुख्यतः पानी और ऑक्सीजन में विघटित हो जाता है। अनुशंसित सांद्रता पर खाद्य संपर्क के लिए सुरक्षित माना जाता है।उचित उपयोग पर कार्सिनोजेनिक या उत्परिवर्तजन प्रभाव के प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। लंबे समय तक संग्रहित किया जा सकता है।
हालाँकि, किसी भी पोस्ट-हार्वेस्ट रसायन का उपयोग करते समय निर्माता के निर्देश, स्थानीय खाद्य सुरक्षा नियमों तथा निर्यात गंतव्य देश के अधिकतम अवशेष स्तर (MRL) का पालन अवश्य करें।
तीसरा चरण: सुखाना (Drying)
उपचार के बाद केले को सीधे पैक नहीं करना चाहिए। उन्हें जालीदार प्लेटफॉर्म पर रखकर उच्च गति वाले पंखे की सहायता से सुखाया जाता है ताकि- अतिरिक्त पानी निकल जाए। सतह पूरी तरह सूख जाए। बाद में फफूंद विकसित होने की संभावना कम हो।
पैकिंग के दौरान नमी से होने वाली क्षति न हो।
चौथा चरण: वैज्ञानिक पैकिंग
अच्छी गुणवत्ता वाले निर्यात योग्य केले को विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए कॉरुगेटेड फाइबर बोर्ड (CFB) बॉक्स में पैक किया जाता है। पैकिंग के दौरान- प्रत्येक हथ्थे का आकार समान रखा जाता है। रोगग्रस्त या क्षतिग्रस्त फल अलग कर दिए जाते हैं आवश्यकतानुसार फोम नेट, लाइनर या कुशनिंग सामग्री का उपयोग किया जाता है। बॉक्स में पर्याप्त वेंटिलेशन रखा जाता है। इसी प्रकार की पैकिंग से फल लंबी दूरी तक सुरक्षित पहुँचते हैं।
कोल्ड चेन का महत्व
यदि केला निर्यात या दूरस्थ बाजारों में भेजना हो तो कोल्ड चेन अत्यंत आवश्यक है। इसमें शामिल हैं- प्री-कूलिंग, नियंत्रित तापमान, उचित आर्द्रता, रेफ्रिजरेटेड परिवहन
वैज्ञानिक पोस्ट-हार्वेस्ट प्रबंधन और कोल्ड चेन अपनाने से फलों की गुणवत्ता लंबे समय तक बनी रहती है तथा परिवहन के दौरान होने वाली क्षति में उल्लेखनीय कमी आती है।
किसानों को क्या लाभ मिलेगा?
वैज्ञानिक पोस्ट-हार्वेस्ट प्रबंधन अपनाने से- फलों की चमक एवं आकर्षण बढ़ता है। रोग एवं सड़न कम होती है। शेल्फ लाइफ बढ़ती है। परिवहन क्षति घटती है। सुपरमार्केट एवं निर्यात बाजार में स्वीकार्यता बढ़ती है। बेहतर ग्रेडिंग के कारण अधिक मूल्य प्राप्त होता है। किसानों की शुद्ध आय में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।
अंत में
आज के प्रतिस्पर्धी बाजार में केवल अधिक उत्पादन ही सफलता की गारंटी नहीं है, बल्कि उच्च गुणवत्ता वाला उत्पादन ही किसानों को अधिक लाभ दिला सकता है। कटाई के बाद वैज्ञानिक धुलाई, स्वच्छता, उपयुक्त एंटीमाइक्रोबियल उपचार, नियंत्रित सुखाने, आधुनिक पैकिंग और कोल्ड चेन प्रबंधन अपनाकर केले की गुणवत्ता को लंबे समय तक बनाए रखा जा सकता है।
इससे घरेलू बाजार के साथ-साथ निर्यात के अवसर भी बढ़ते हैं और किसानों को अपने उत्पाद का सर्वोत्तम मूल्य प्राप्त होता है। याद रखें- “अच्छी खेती लाभ देती है, लेकिन वैज्ञानिक पोस्ट-हार्वेस्ट प्रबंधन उस लाभ को कई गुना बढ़ा देता है।”
निष्कर्ष: भारत दुनिया का सबसे बड़ा केला उत्पादक देश होने के बावजूद वैश्विक बाजार में अपनी सही पहचान तभी बना पाएगा, जब हमारे किसान भाई आधुनिक तौर-तरीकों को अपनाएंगे।
कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने के लिए फिटकरी और Huwa-San जैसी उन्नत तकनीकों से धुलाई, सटीक सुखाने की विधि और कॉरुगेटेड बॉक्स (CFB) में वैज्ञानिक पैकिंग बेहद कारगर साबित हो सकती है। “अच्छी खेती लाभ देती है, लेकिन वैज्ञानिक पोस्ट-हार्वेस्ट प्रबंधन उस लाभ को कई गुना बढ़ा देता है।”
इस सिद्धांत को अपनाकर न केवल फलों की शेल्फ लाइफ बढ़ेगी, बल्कि हमारे किसान साथी सुपरमार्केट और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से अपने उत्पाद का सर्वोत्तम मूल्य प्राप्त कर सकेंगे।
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