बांग्लादेश ने निजी व्यापारियों को भारत से 10 मार्च 2026 तक 2 लाख टन उबले चावल यानी पारबॉयल्ड राइस के आयात की अनुमति देने का फैसला किया है। यह कदम देश में चावल की कीमतों में तेजी और हालिया बाढ़ के बाद उत्पादन में आई गिरावट के बीच उठाया गया है। यह निर्णय ढाका की 2025-26 में लगभग 9 लाख टन चावल आयात करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य भंडार मजबूत करना और घरेलू बाजार में कीमतों को स्थिर रखना है।
बांग्लादेश के खाद्य मंत्रालय के अनुसार, निजी आयात केवल गैर-सुगंधित पारबॉयल्ड चावल तक सीमित रहेगा, जिसमें टूटे दानों की अधिकतम सीमा 5 प्रतिशत तय की गई है। आयातकों को यह चावल मूल बोरो में ही बेचना होगा और भंडारण व बिक्री का पूरा विवरण दर्ज कराना अनिवार्य होगा, ताकि जमाखोरी पर अंकुश लगाया जा सके। कुल आयात लक्ष्य में से 5 लाख टन निजी व्यापारियों के माध्यम से मंगाया जाएगा, जबकि शेष 4 लाख टन सरकार-से-सरकार सौदों और अंतरराष्ट्रीय निविदाओं के जरिये खरीदा जाएगा।
चालू वित्त वर्ष में भारतीय निर्यातक पहले ही बांग्लादेश को 1.5 लाख टन से अधिक चावल भेज चुके हैं, जबकि अक्टूबर 2025 में 50,000 टन के अतिरिक्त टेंडर भी हासिल किए गए थे। लागत प्रतिस्पर्धा के मोर्चे पर भारत की स्थिति मजबूत बनी हुई है। हालिया निविदाओं में भारतीय सफेद चावल की कीमत 351360 डॉलर प्रति टन रही, जबकि पाकिस्तान का भाव करीब 395 डॉलर प्रति टन था।
मार्च 2025 में निर्यात प्रतिबंध और न्यूनतम निर्यात मूल्य हटाए जाने के बाद भारत का चावल निर्यात पिछले वर्ष 19.4 प्रतिशत बढ़कर 2.155 करोड़ टन पहुंच गया है। इससे बांग्लादेश के सबसे बड़े आपूर्तिकर्ता के रूप में भारत की स्थिति और मजबूत हुई है, वहीं दक्षिण एशिया के चावल व्यापार में भारत की निर्णायक भूमिका और स्पष्ट हो गई है।
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