वैश्विक मांग कमजोर पड़ने से भारत के मसाला निर्यात में गिरावट

वैश्विक बाजार में आई सुस्ती और कुछ प्रमुख मसालों की मांग में कमी के चलते भारतीय मसाला निर्यात के लिए वित्त वर्ष 2025-26 चुनौतियों भरा रहा है। विदेश व्यापार महानिदेशालय के आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में निर्यात से होने वाली आय और मात्रा दोनों में गिरावट दर्ज की गई है।

विदेश व्यापार महानिदेशालय द्वारा जारी किए गए ताजा आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल मसाला निर्यात मूल्य के आधार पर 5.3 प्रतिशत घटकर 2.80 अरब डॉलर रह गया है। पिछले वित्त वर्ष में यह आंकड़ा 2.96 अरब डॉलर पर था।

मात्रा के मोर्चे पर भी गिरावट का सिलसिला जारी रहा और यह 13 लाख टन से घटकर 12.16 लाख टन पर आ गई, जो लगभग 6.4 प्रतिशत कम है। भारत के निर्यात बास्केट में सबसे अहम स्थान रखने वाली ‘मिर्च’ और ‘जीरा’ के प्रदर्शन ने इस बार निराश किया है।

मूल्य और मात्रा दोनों के लिहाज से भारत का सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद मिर्च के निर्यात से होने वाली आय में 12.9 प्रतिशत की कमी आई और यह 1.09 अरब डॉलर पर सिमट गई। वहीं जीरा निर्यात के मूल्य में भी 28.4 प्रतिशत की बड़ी गिरावट देखी गई।

मिर्च की निर्यात मात्रा में जहाँ 4.5 प्रतिशत की कमी रही, वहीं जीरे की मात्रा में 14.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिससे कुल निर्यात राजस्व पर गहरा असर पड़ा है। पूरे वित्त वर्ष में सबसे कमजोर प्रदर्शन ‘सौंफ’ का रहा है, जिसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी दबाव का सामना करना पड़ा। सौंफ के निर्यात से होने वाली आय में 46.2 प्रतिशत की जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई है।

यदि मात्रा की बात करें, तो सौंफ का निर्यात आधे से भी ज्यादा यानी 56.7 प्रतिशत तक गिर गया है। यह गिरावट बताती है कि सौंफ के प्रमुख खरीदार देशों ने या तो अपनी खरीद कम कर दी है या फिर भारतीय सौंफ को अन्य उत्पादक देशों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है।

हालाँकि, तमाम नकारात्मक आंकड़ों के बीच ‘इलायची’ एक शानदार अपवाद बनकर उभरी है। इलायची निर्यात से होने वाली आय पिछले साल के मुकाबले दोगुनी से भी अधिक बढ़कर 449.48 मिलियन डॉलर तक जा पहुँची है। मात्रा के आधार पर भी इलायची ने 105.7 प्रतिशत की असाधारण वृद्धि दर्ज की है।

इलायची के साथ-साथ अदरक ने भी बाजार में अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखी। अदरक के निर्यात मूल्य में 14.3 प्रतिशत और मात्रा में 10.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि काली मिर्च की निर्यात आय में 10.1 प्रतिशत का उछाल देखा गया।

काली मिर्च की निर्यात मात्रा में मामूली गिरावट जरूर रही, लेकिन बेहतर कीमतों ने राजस्व को बढ़ाए रखा। दूसरी ओर, हल्दी और धनिया के निर्यात में कोई बड़ा उतार-चढ़ाव नहीं देखा गया और इनका प्रदर्शन लगभग पिछले साल के स्तर पर ही स्थिर बना रहा।

निष्कर्ष: वैश्विक बाजार में सुस्ती और प्रमुख मसालों की मांग में कमी के कारण वित्त वर्ष 2025-26 भारतीय मसाला निर्यात के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा, जिसके परिणामस्वरूप कुल निर्यात मूल्य (5.3%) और मात्रा (6.4%) दोनों में गिरावट दर्ज की गई।

इस मंदी का मुख्य कारण मिर्च, जीरा और विशेष रूप से सौंफ (जिसकी आय में 46.2% की भारी गिरावट आई) जैसे पारंपरिक रूप से मजबूत मसालों के प्रदर्शन का कमजोर होना रहा।

हालाँकि, इस निराशाजनक दौर के बीच इलायची एक शानदार अपवाद बनकर उभरी, जिसने अपनी आय और मात्रा दोनों में दोगुनी से अधिक की असाधारण वृद्धि दर्ज की, जबकि अदरक और काली मिर्च ने भी बेहतर प्रदर्शन के साथ सहारा दिया।

संक्षेप में, यह रिपोर्ट दर्शाती है कि जहाँ कुछ पारंपरिक मसालों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कड़ी प्रतिस्पर्धा और कम मांग का सामना करना पड़ रहा है, वहीं इलायची जैसे उत्पादों में वृद्धि ने भारतीय मसाला क्षेत्र को पूरी तरह टूटने से बचा लिया और भविष्य के लिए विविधीकरण (Diversification) की आवश्यकता को रेखांकित किया।

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