गेहूं हमारी मुख्य फसलों में से एक है, लेकिन पकने के समय कुछ ऐसी बीमारियां आती हैं जो किसानों की पूरी मेहनत पर पानी फेर सकती हैं। क्या आपने अपने खेत में गेहूं की बालियों को काला पड़ते या कोयले जैसा चूर्ण बनते देखा है? अगर हाँ, तो यह ‘कनाल बंट’ या ‘लूज स्मट’ रोग है। इस तस्वीर को ध्यान से देखिए। बाईं ओर की बाली स्वस्थ दिख रही है, लेकिन दाईं ओर की बालियां पूरी तरह से काली और झुलसी हुई हैं।
कनाल बंट: इसमें दाने के अंदर काला पाउडर भर जाता है और मछली जैसी गंध आती है।
लूज स्मट: इसमें पूरी बाली काले चूर्ण में बदल जाती है और हवा चलने पर यह पाउडर उड़कर दूसरे पौधों को भी संक्रमित कर देता है।
यह बीमारियाँ फफूंद के कारण होती हैं। अगर बीज पहले से संक्रमित हो, या फरवरी-मार्च के महीने में तापमान 18 से 25 डिग्री के बीच हो और हवा में नमी अधिक हो, तो यह बीमारी बहुत तेजी से फैलती है। इससे बचने के लिए किसानों को कुछ जरूरी कदम उठाने होंगे: जैसे
रोगग्रस्त बालियों को नष्ट करना: खेत में जो भी बाली काली दिखे, उसे सावधानी से पॉलीथीन बैग में ढककर जड़ से उखाड़ लें और जला दें ताकि पाउडर हवा में न फैले।
बीज उपचार: अगली बार गेहूं की बुवाई करने से पहले बीजों को जी-बायो फॉस्फेट एडवांस से जरूर उपचारित करें।
फफूंदनाशक का छिड़काव: बाली निकलने के समय अगर लक्षण दिखें, तो तुरंत जैविक उपचार करें। इसके लिए 150 लीटर पानी में एक लीटर जी-बायो फॉस्फेट एडवांस को मिलाकर संध्या के समय स्प्रे करें या ठंडे वातावरण में। किसान भाइयों, सही समय पर रोगों व कीटों की पहचान और उपचार ही आपकी फसल को बचा सकता है। अपनी फसल की निगरानी निरंतर करते रहें।
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