केंद्रीय खाद्य मंत्रालय ने चावल फोर्टिफिकेशन कार्यक्रम को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया है। मंत्रालय के अनुसार, कार्यक्रम को आगे बढ़ाने से पहले पोषक तत्वों की आपूर्ति और वितरण के लिए अधिक मजबूत तंत्र विकसित करना आवश्यक है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस निर्णय का असर सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस), एकीकृत बाल विकास सेवा (आईसीडीएस) या पीएम पोषण योजना के तहत खाद्यान्न वितरण पर नहीं पड़ेगा।
लाभार्थियों को निर्धारित मात्रा में चावल पूर्ववत मिलता रहेगा। वर्ष 2025-26 के खरीफ विपणन सत्र तथा 2024-25 के लंबित भंडार के संदर्भ में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को परिचालन सुविधा के अनुसार फोर्टिफाइड या गैर-फोर्टिफाइड चावल वितरित करने की अनुमति दी गई है। यह कार्यक्रम वर्ष 2019 में पायलट के रूप में शुरू हुआ था और चरणबद्ध विस्तार के बाद मार्च 2024 तक देशभर में लागू किया गया।
मंत्रालय ने संकेत दिया है कि संरचनात्मक सुधार लागू होने के बाद कार्यक्रम दोबारा शुरू किया जाएगा, हालांकि इसके लिए फिलहाल कोई समयसीमा तय नहीं की गई है। यह कदम पोषण सुरक्षा से जुड़ी इस प्रमुख पहल में डिलीवरी तंत्र की व्यापक समीक्षा और मजबूती की दिशा में उठाया गया नीतिगत निर्णय माना जा रहा है। कुपोषण के खिलाफ जंग जरूरी है, लेकिन वह किसी की जान की कीमत पर नहीं होनी चाहिए।
सरकार का यह ‘अस्थायी ठहराव’ असल में एक ‘सुरक्षा जांच’ है। यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि जो चावल एनीमिया मिटाने के लिए बांटा जा रहा है, वह किसी अन्य गंभीर बीमारी का कारण न बन जाए। आने वाले समय में वैज्ञानिक रिपोर्ट ही तय करेगी कि फोर्टिफाइड चावल हमारी थाली का हिस्सा बना रहेगा या हमें पोषण के पारंपरिक तरीकों की ओर वापस मुड़ना होगा।
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