केंद्र सरकार की न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी योजना के तहत चना की खरीद मार्च के मध्य से शुरू होने की संभावना है, जब कृषि मंडियों में उचित गुणवत्ता वाला माल पर्याप्त मात्रा में पहुंचने लगेगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हालांकि चना की आवक फरवरी से शुरू होने की उम्मीद है, लेकिन नमी का स्तर अनुमेय सीमा में आने तक खरीद टाली जाएगी।
चना खरीद हेतु तय मानकों के अनुसार अधिकतम 12 प्रतिशत नमी स्वीकार्य है, जो आमतौर पर मार्च के मध्य के बाद ही हासिल होती है। अधिकारी के अनुसार, “करीब 15 मार्च से महीने के अंत तक अच्छी गुणवत्ता का माल आने लगेगा, तभी खरीद शुरू होगी।” सरकार का लक्ष्य बफर स्टॉक के लिए कम से कम 10 लाख टन चना खरीदने का है। यदि उपलब्धता अधिक रही और बाजार भाव एमएसपी पर या उससे नीचे रहे, तो खरीद को और बढ़ाया जा सकता है।
मूल्य समर्थन योजना के तहत खरीद तय मात्रा तक सीमित नहीं रहती और बाजार स्थितियों के अनुसार इसका विस्तार किया जा सकता है। हाल के दिनों में चना की कीमतों में हल्की तेजी जरूर आई है, लेकिन वे अब भी 5,875 रुपए प्रति क्विंटल के एमएसपी के आसपास बनी हुई हैं, क्योंकि पुराने सीजन की आवक घट रही है। नई फसल की आवक तेज होने तक कीमतों के सीमित दायरे में रहने की संभावना है।
क्षेत्रीय स्तर पर, महाराष्ट्र और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में फरवरी से, मध्य प्रदेश और गुजरात में मार्च से तथा राजस्थान में अप्रैल से रबी चना बाजार में आने की उम्मीद है, जिससे आगे चलकर कीमतों पर दबाव बन सकता है।
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