भारत में नैनो उर्वरकों और कृषि ड्रोन का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, जो खेती को प्रिसिजन फार्मिंग की दिशा में आगे बढ़ाने का संकेत है। देश में अब तक 1,593.37 लाख बोतल नैनो उर्वरकों की बिक्री हो चुकी है, जिसमें नैनो यूरिया की 1,219.27 लाख और नैनो डीएपी की 374.10 लाख बोतलें शामिल हैं।
परीक्षणों के अनुसार, नैनो यूरिया के उपयोग से पारंपरिक यूरिया की खपत 25 से 50 प्रतिशत तक कम की जा सकती है, जबकि 3 से 8 प्रतिशत तक उपज बढ़ने की संभावना है। वहीं नैनो डीएपी पारंपरिक फॉस्फोरस उर्वरकों का करीब 50 प्रतिशत तक विकल्प बन सकता है। इन उत्पादों के प्रभाव का व्यापक आकलन करने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) द्वारा पांच वर्षीय अध्ययन भी किया जा रहा है, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों में इनके प्रदर्शन का मूल्यांकन हो रहा है।
कृषि में ड्रोन तकनीक का उपयोग भी तेजी से बढ़ रहा है। ‘नमो ड्रोन दीदी योजना’ (1,261 करोड़ रुपय) के तहत अब तक 1,094 ड्रोन तैनात किए जा चुके हैं, जिनके माध्यम से महिला स्वयं सहायता समूहों को छिड़काव कार्य के लिए प्रशिक्षित किया गया है। इसके अलावा 297 ड्रोन के जरिए 36,000 से अधिक फील्ड डेमोंस्ट्रेशन किए जा चुके हैं, जिससे किसानों में तकनीक के प्रति जागरूकता बढ़ी है। इन पहलों का उद्देश्य कृषि लागत घटाना, दक्षता बढ़ाना और टिकाऊ तकनीक आधारित खेती को बढ़ावा देना है।
निष्कर्ष साफ है- परिवर्तन ही प्रगति है। नैनो उर्वरक मिट्टी की जान बचा रहे हैं, और ड्रोन किसान का समय। जब ये दोनों मिलते हैं, तो जन्म होता है एक ऐसी खेती का जो टिकाऊ है, स्मार्ट है और समृद्ध है। भविष्य अब खेतों में उग रहा है, और यह भविष्य ‘सटीक’ है!
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