बिहार के सीमांचल और आसपास के क्षेत्रों में 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चली तेज आंधी-तूफान ने फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। फसल के अहम चरण में आए इस चक्रवाती जैसे हालात ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। किशनगंज, कटिहार और पूर्णिया जिलों में तेज हवाओं से मक्का की फसलें पूरी तरह बिछ गईं, जिससे बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है।
वहीं सुपौल, सहरसा, मधेपुरा और भागलपुर में भी फसलों को नुकसान की खबरें सामने आई हैं। बागवानी फसलों पर भी इसका असर पड़ा है। तेज हवाओं और आकाशीय बिजली के कारण आम और लीची की फसल प्रभावित हुई है, जिससे बागवानी किसानों को भी नुकसान उठाना पड़ा है। उत्तर बिहार के दरभंगा और मधुबनी जैसे जिलों में ओलावृष्टि और बारिश से कटाई के करीब पहुंची गेहूं की फसल प्रभावित हुई है।
कई स्थानों पर जलभराव की स्थिति ने नुकसान की आशंका और बढ़ा दी है। पूर्वी और पश्चिमी चंपारण में भी गेहूं की फसल प्रभावित हुई है, हालांकि नुकसान का आकलन अभी जारी है। वहीं भोजपुर और बक्सर में हुई हल्की बारिश से कुछ फसलों को फायदा भी मिला है, जिससे कुल प्रभाव मिश्रित रहा है।
प्रशासन ने नुकसान का सर्वे शुरू कर दिया है, जबकि किसान जल्द मुआवजा और राहत की मांग कर रहे हैं। सीमांचल में आई यह आपदा केवल फसलों का नुकसान नहीं, बल्कि हजारों किसानों की सालभर की मेहनत पर फिरा पानी है। प्रशासन द्वारा ‘नुकसान का आकलन’ केवल कागजों तक सीमित न रहकर, जल्द से जल्द ‘आर्थिक मदद’ के रूप में किसानों के खातों तक पहुंचना अनिवार्य है।
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