केंद्र सरकार तूर यानी अरहर और उड़द जैसे प्रमुख दलहनों के शुल्क मुक्त आयात की अवधि 31 मार्च के बाद भी बढ़ाने पर विचार कर रही है। घरेलू उत्पादन में गिरावट और आयात लागत बढ़ने की आशंकाओं के बीच यह कदम उठाया जा सकता है।
वर्ष 2025-26 के दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार तूर का उत्पादन 4.66 प्रतिशत घटकर 34.55 लाख टन रहने का अनुमान है, जबकि पिछले वर्ष यह 36.24 लाख टन था। उड़द उत्पादन में भी कमी दर्ज की गई है। खरीफ उड़द उत्पादन 10.7 प्रतिशत घटकर 12.06 लाख टन और रबी उत्पादन 8.14 प्रतिशत घटकर 5.08 लाख टन रहने का अनुमान है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण आयात लागत में वृद्धि की आशंका है, जिससे सरकार महंगाई के जोखिम को लेकर सतर्क है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, समुद्री परिवहन पर युद्ध जोखिम प्रीमियम में वृद्धि और कमजोर रुपय के कारण दलहन आयात महंगा हो गया है। इसके अलावा पैकेजिंग लागत भी बढ़ी है और पॉलीप्रोपाइलीन बैग की कीमतें एक सप्ताह में लगभग दोगुनी होने की खबर है।
भारत दलहन एवं अनाज संघ (आईपीजीए) के चेयरमैन बिमल कोठारी के अनुसार पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने और कीमतों में तेज उछाल को रोकने के लिए शुल्क मुक्त आयात की अवधि बढ़ाना जरूरी हो सकता है। उनका कहना है कि इस समय आयात पर प्रतिबंध लगाने से घरेलू उपलब्धता पर दबाव पड़ सकता है।
फिलहाल तूर और उड़द का आयात शुल्क मुक्त है, जबकि चना और मसूर पर 10 प्रतिशत आयात शुल्क तथा पीली मटर पर 30 प्रतिशत शुल्क लागू है। व्यापारियों का मानना है कि घरेलू कीमतें अपेक्षाकृत स्थिर रहने के कारण मौजूदा शुल्क ढांचा फिलहाल जारी रह सकता है।
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