गुजरात का डांग जिला अब अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ राज्य के प्रमुख स्ट्रॉबेरी हब के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। प्राकृतिक खेती की पहल ने यहां के किसानों की किस्मत बदल दी है, जहां अब वे प्रति हेक्टेयर सालाना 8 लाख रुपये तक की आय अर्जित कर रहे हैं।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, स्ट्रॉबेरी की खेती का रकबा वर्ष 2022-23 के महज 20 हेक्टेयर से बढ़कर अब 2025-26 में लगभग 33 हेक्टेयर तक पहुंच चुका है। उत्पादन के मामले में भी यह उछाल स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है, जो 140 टन से बढ़कर वर्तमान में 196 टन हो गया है और इसके 233 टन तक पहुंचने का अनुमान है।
डांग को भारत का पहला पूर्ण प्राकृतिक खेती जिला घोषित किए जाने के बाद से यहां रसायन मुक्त कृषि की दिशा में एक बड़ी क्रांति आई है। जिले की ठंडी जलवायु और जैविक तत्वों से भरपूर रेतीली-दोमट मिट्टी स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए वरदान साबित हुई है।
अनुकूल वातावरण के कारण किसान यहां विंटर डॉन, कैमारोसा, स्वीट चार्ली और सेल्वा जैसी नौ अलग-अलग किस्मों की सफलतापूर्वक खेती कर रहे हैं। इनमें से विंटर डॉन किस्म अपनी अधिक उत्पादन क्षमता और बाजार में उच्च मांग के कारण स्थानीय किसानों के बीच सबसे पसंदीदा बनकर उभरी है।
राज्य सरकार आहवा और वाघई तालुकों में किसानों को पौधों और अन्य कृषि इनपुट पर 55 से 75 प्रतिशत तक की बड़ी वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है। इसी प्रोत्साहन का परिणाम है कि डांग के कई किसान अपनी पारंपरिक फसलों और मजदूरी के काम को छोड़कर इस उच्च मूल्य वाली फसल की ओर रुख कर रहे हैं।
इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर मौसमी रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए हैं। बाजार के लिहाज से भी डांग की स्ट्रॉबेरी ने अपनी सीमाओं का विस्तार किया है।
शुरुआती दौर में जहां इसकी बिक्री केवल स्थानीय सापुतारा और आहवा के बाजारों तक ही सीमित थी, वहीं अब इसकी मिठास अहमदाबाद, सूरत और भरूच जैसे बड़े शहरों के बाजारों तक पहुंच रही है। प्राकृतिक रूप से उगाई गई इन स्ट्रॉबेरी की गुणवत्ता और स्वाद के कारण उपभोक्ता भी इन्हें काफी पसंद कर रहे हैं।
निष्कर्ष: गुजरात का डांग जिला अपनी अनुकूल जलवायु, उपजाऊ मिट्टी और सरकारी प्रोत्साहन के बल पर एक प्रमुख स्ट्रॉबेरी हब के रूप में उभर रहा है। पूर्ण प्राकृतिक खेती (रसायन मुक्त कृषि) को अपनाने से न केवल स्ट्रॉबेरी के उत्पादन और खेती के रकबे में भारी बढ़ोतरी हुई है, बल्कि किसानों की वार्षिक आय में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
‘विंटर डॉन’ जैसी उच्च मांग वाली किस्मों और बड़े शहरों तक विस्तृत होते बाजार के कारण यह नगदी फसल स्थानीय किसानों के लिए बेहद मुनाफे का सौदा साबित हो रही है।
संक्षेप में कहें, तो डांग में स्ट्रॉबेरी उत्पादन ने पारंपरिक खेती को छोड़कर जैविक और उच्च मूल्य वाली फसलों की ओर बढ़ने का एक सफल मॉडल पेश किया है, जिसने ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार को एक नई दिशा दी है।
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