यह एक लीफ माइनर है मुख्य रूप से छोटी मक्खियों के समूह से संबंधित होता है, यह कीट अपने जीवन चक्र के दौरान पत्तियों के अंदर ही भोजन करता है, जिससे पत्तियों के ऊपरी और निचले भाग के बीच सुरंग जैसी संरचनाएं बन जाती हैं। यही कारण है कि इसे लीफ माइनर कहा जाता है। इस कीट की पहचान करना ज्यादा कठिन नहीं है।
यदि किसान पत्तियों को ध्यान से देखें तो पत्तियों पर सफेद या हल्के चांदी जैसे घुमावदार निशान दिखाई देते हैं, जो सांप जैसी लकीरों के रूप में फैले रहते हैं। इन्हें सेरपेंटाइन माइन कहा जाता है। जैसे-जैसे लार्वा बड़ा होता है, यह सुरंग भी चौड़ी होती जाती है और उसके अंदर काले रंग का मल भी दिखाई दे सकता है। कई बार पत्तियों पर छोटे-छोटे सफेद बिंदु भी दिखाई देते हैं, जो वयस्क मादा मक्खी द्वारा अंडे देने या रस चूसने के कारण बनते हैं।
यदि इस कीट का प्रकोप अधिक हो जाए तो पत्तियों की प्रकाश संश्लेषण क्षमता कम हो जाती है और धीरे-धीरे पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं व सूख जाती हैं और समय से पहले गिर सकती हैं। छोटे पौधों में अधिक नुकसान होने पर पौधों की बढ़वार रुक जाती है, फल धूप से झुलस सकते हैं और कभी-कभी पौधे पूरी तरह कमजोर भी हो जाते हैं।
इसलिए इस कीट को शुरुआत में ही पहचानना और जैविक नियंत्रण करना बहुत महत्वपूर्ण है।प्रबंधन की शुरुआत हमेशा निगरानी और खेत की साफ-सफाई से करनी चाहिए। खेत में पीले स्टिकी ट्रैप लगाने से वयस्क मक्खियों की निगरानी करना आसान हो जाता है, क्योंकि यह मक्खियां पीले रंग की ओर आकर्षित होती हैं। इससे कीट की संख्या का अंदाजा भी लगाया जा सकता है।
इसके अलावा संक्रमित पत्तियों को समय-समय पर तोड़कर नष्ट कर देना चाहिए ताकि कीट का जीवन चक्र आगे न बढ़ सके। फसल के अवशेषों को भी खेत में इकट्ठा न रहने दें, क्योंकि इनमें कीट के प्यूपा मिट्टी में सुरक्षित रह सकते हैं। खाद प्रबंधन भी इस कीट के प्रकोप को प्रभावित करता है। यदि खेत में नाइट्रोजन की मात्रा बहुत अधिक दी जाती है तो पौधे कोमल और आकर्षक बन जाते हैं, जिससे लीफ माइनर का प्रकोप बढ़ सकता है।
इसलिए संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाना जरूरी है। प्राकृतिक रूप से भी इस कीट को नियंत्रित करने वाले कई लाभकारी परजीवी कीट मौजूद होते हैं, जैसे डिग्लिफस और क्राइसोकैरिस प्रजातियां। ये परजीवी कीट लीफ माइनर के लार्वा को नष्ट कर देते हैं।
इसलिए अनावश्यक रूप से तेज या व्यापक प्रभाव वाले कीटनाशकों का उपयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे ये लाभकारी कीट भी नष्ट हो सकते हैं। जब खेत में प्रकोप आर्थिक नुकसान की सीमा तक पहुंच जाए, जैसे एक पत्ती पर 4 से 5 सक्रिय सुरंगें दिखाई देने लगें, तब रासायनिक नियंत्रण करना आवश्यक हो जाता है। लीफ माइनर के नियंत्रण के लिए कुछ प्रभावी कीटनाशक उपलब्ध हैं जो पत्तियों के अंदर तक पहुंचकर लार्वा को नियंत्रित कर सकते हैं।
जी-बायो फॉस्फेट एडवांस का छिड़काव 15 मिली 15 लीटर पानी के टैंक में मिलाकर किया जा सकता है, या 150 लीटर पानी में एक लीटर जी-बायो एडवांस ओर 100 किलोग्राम गाय की ताजी गोबर को किसी टैंक में मिलाकर प्रति एकड़ खेत में लगाए गए पौधों के जड़ों के पास थाला बनाकर एक से डेढ़ मग डालें। यह दवा पत्ती के अंदर मौजूद लार्वा पर अच्छा प्रभाव दिखाती है।
रासायनिक नियंत्रण करते समय कुछ महत्वपूर्ण सावधानियों का पालन करना जरूरी है। हमेशा सुबह या शाम के समय ही छिड़काव करें ताकि दवा का प्रभाव बेहतर रहे और परागण करने वाले कीटों पर कम असर पड़े। पत्तियों के ऊपर और नीचे दोनों सतहों पर अच्छी तरह स्प्रे करना चाहिए ताकि दवा पूरी तरह पहुंच सके।
यदि किसान भाई समय पर पहचान, निगरानी, खेत की सफाई, संतुलित पोषण और आवश्यकता अनुसार सही कीटनाशकों का उपयोग करें, तो लीफ माइनर जैसे कीट को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है और फसल को होने वाले नुकसान से बचाया जा सकता है।
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