केंद्रीय मंत्रिमंडल ने खरीफ सीजन 2026 के लिए फॉस्फेटिक और पोटाशिक उर्वरकों पर पोषण मूल्य आधारित सब्सिडी की नई दरों को मंजूरी दे दी है। यह फैसला अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरक इनपुट्स की कीमतों में हो रहे उतार-चढ़ाव से भारतीय किसानों को सुरक्षित रखने के लिए लिया गया है। सरकार ने सब्सिडी के बजट को बढ़ाकर लगभग 41,533.81 करोड़ रुपय कर दिया है।
अगर इसकी तुलना पिछले साल (खरीफ 2025) से करें, तो यह करीब 4,317 करोड़ रुपय अधिक है। बजट में यह बढ़ोतरी इसलिए की गई है ताकि यूरिया, डीएपी और सल्फर जैसे इनपुट्स की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में होने वाली बढ़त का बोझ देश के किसानों पर न पड़े।
सरकार उर्वरक कंपनियों और आयातकों के माध्यम से किसानों को 28 अलग-अलग प्रकार के उर्वरक (डीएपी सहित) रियायती दरों पर उपलब्ध कराएगी। साल 2010 से लागू यह एनबीएस प्रणाली सुनिश्चित करती है कि खाद में मौजूद पोषक तत्वों के आधार पर सब्सिडी का लाभ सीधे तौर पर खेती की लागत घटाने में मिले।
मंजूरी के मुख्य लाभ
कीमतों में स्थिरताः यूरिया, डीएपी और एमओपी जैसे इनपुट्स की वैश्विक कीमतों में अस्थिरता के बावजूद घरेलू बाजार में कीमतें स्थिर रहेंगी।
निर्बाध आपूर्तिः निर्माताओं और आयातकों को समय पर सब्सिडी मिलने से बाजार में उर्वरकों की कमी नहीं होगी।
28 श्रेणियों का कवरेज: डीएपी के साथ-साथ अन्य जटिल उर्वरकों को भी इस योजना में शामिल किया गया है, जिससे किसानों के पास चुनाव के अधिक विकल्प होंगे।
सरकार की यह सक्रिय रणनीति विशेष रूप से उन छोटे और सीमांत किसानों के लिए राहत भरी है, जिनके लिए खेती की लागत का एक बड़ा हिस्सा उर्वरकों पर खर्च होता है।
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