पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच केंद्र सरकार ने भरोसा दिलाया है कि देश में उर्वरकों की आपूर्ति पूरी तरह स्थिर है और किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराई जाएगी। लोकसभा में केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने स्पष्ट किया कि मौजूदा परिस्थितियों के बावजूद किसी प्रकार की कमी नहीं है। आयात पर निर्भरता घटाने के लिए सरकार ने संसाधन-समृद्ध देशों के साथ दीर्घकालिक आपूर्ति समझौते किए हैं और घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
मंत्री जे.पी. नड्डा ने बताया कि पोषक तत्व आधारित ढांचे के तहत 59.65 लाख टन क्षमता के नए डीएपी और एनपीके संयंत्रों तथा एसिड इकाइयों का विकास किया जा रहा है। दीर्घकालिक रणनीति के तहत नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के अंतर्गत 7.24 लाख टन ग्रीन अमोनिया की खरीद का प्रावधान किया गया है, जिससे आयात निर्भरता कम हो सके।
कृषि स्तर पर संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए मृदा परीक्षण, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन, नीम-लेपित यूरिया और धीमी गति से घुलने वाले उर्वरकों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके अलावा प्रशिक्षण, फील्ड डेमो और जागरूकता अभियानों के जरिए किसानों को उर्वरकों के कुशल उपयोग के लिए प्रेरित किया जा रहा है, ताकि यूरिया के अति उपयोग को रोका जा सके और मिट्टी की सेहत बेहतर हो।
सरकार का स्पष्ट संदेश है कि वैश्विक अस्थिरता का बोझ भारतीय किसानों पर नहीं पड़ने दिया जाएगा। प्रशिक्षण और जागरूकता के माध्यम से किसानों को आधुनिक और कुशल कृषि की ओर ले जाने का प्रयास किया जा रहा है ताकि लागत कम हो और पैदावार बेहतर हो।
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