भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कृषि है, और जब भी बजट या नई सरकारी घोषणाएं आती हैं, तो सबकी नजरें खेती की ओर मुड़ जाती हैं। हालिया घोषणाओं में सरकार ने दो चीजों पर सबसे ज्यादा जोर दिया है: Agri-Infrastructure और RKVY यानी राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के आवंटन में बढ़ोतरी।
केंद्रीय बजट 2026-27 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना यानी पीएम-आरकेवीवाई के लिए 8,550 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। यह राशि पिछले वर्ष के 8,500 करोड़ रुपये के मुकाबले थोडी ज्यादा है।
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना का उद्देश्य कृषि और संबद्ध क्षेत्रों का समावेशी तथा एकीकृत विकास सुनिश्चित करना है। इसके तहत फसल की कटाई के पहले एवं बाद की अवसंरचना को मजबूत करने, कृषि उद्यमिता को बढ़ावा देने, नवाचार को प्रोत्साहित करने और कृषि उत्पादों में मूल्य संवर्धन को बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही आवंटन में वृद्धि सीमित हो, लेकिन यदि राज्यों द्वारा धन का परिणामोन्मुख और समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित किया जाता है, तो यह योजना कृषि उत्पादकता, ग्रामीण रोजगार और आपूर्ति शृंखला दक्षता में उल्लेखनीय सुधार ला सकती है।
सरकार का फोकस अब केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि कृषि को प्रतिस्पर्धी, तकनीक-समर्थ और बाजार-उन्मुख बनाने पर केंद्रित है, जिसमें पीएम-आरकेवीवाई एक प्रमुख साधन के रूप में देखा जा रहा है।
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