अगस्त में उर्वरकों की बिक्री 10.33% घटी, सल्फर 262% महंगा; यूरिया हुआ सस्ता

बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2026 के दौरान भारत में उर्वरकों की कुल घरेलू बिक्री सालाना आधार पर 10.33 प्रतिशत घटकर 65.1 लाख टन रह गई। बिक्री में आई इस कमी का मुख्य कारण अगस्त महीने में देशभर में संचयी बारिश का सामान्य से 16.3 प्रतिशत कम रहना रहा, जिससे खेतों में उर्वरकों की मांग प्रभावित हुई।

यूरिया और कॉम्प्लेक्स खाद की बिक्री में गिरावट, डीएपी की मांग बढ़ी

यूरिया की बिक्री 3.66 प्रतिशत घटकर 42.1 लाख टन दर्ज की गई। इसके विपरीत, डीएपी की बिक्री अगस्त 2025 के 9.8 लाख टन से बढ़कर इस वर्ष अगस्त में 10.3 लाख टन हो गई। वहीं, एमओपी की बिक्री में लगभग 10 प्रतिशत और अन्य कॉम्प्लेक्स उर्वरकों की बिक्री में करीब 34 प्रतिशत की उल्लेखनीय गिरावट आई।

अग्रिम भंडारण और फसल उत्पादकता पर बाजार विशेषज्ञों की राय

यद्यपि उर्वरकों की बिक्री में इस कमी से आगामी समय में प्रति हेक्टेयर फसल उत्पादकता प्रभावित होने की चिंता है, परंतु बाजार विशेषज्ञों के अनुसार इसका एक कारण सीजन के प्रारंभ में ही किसानों द्वारा पर्याप्त मात्रा में उर्वरकों का अग्रिम भंडारण करना भी हो सकता है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सल्फर की कीमतों में 262% का भारी उछाल

अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरक क्षेत्र के कच्चे माल की कीमतों में भारी उछाल देखा गया है। अगस्त के दौरान सल्फर की औसत अंतरराष्ट्रीय कीमत सालाना आधार पर 262 प्रतिशत बढ़ी, जबकि अमोनिया की कीमत में लगभग 23 प्रतिशत और फॉस्फोरिक एसिड के दाम में करीब 18 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई।

आयातित यूरिया 9 महीने के निचले स्तर पर: भारत ने मंगाया 7 लाख टन

चूंकि भारत इन कच्चे मालों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है, इसलिए इससे डीएपी और कॉम्प्लेक्स उर्वरकों की घरेलू उत्पादन लागत बढ़ गई है। इसके विपरीत, आयातित यूरिया की औसत कीमत 23.54 प्रतिशत घटकर 406 डॉलर प्रति टन पर आ गई, जो पिछले नौ महीनों का निचला स्तर है। इस घटती मूल्य दर के बीच अगस्त में भारत ने लगभग 7.0 लाख टन यूरिया का आयात किया है।

निष्कर्ष: अगस्त के महीने में उर्वरकों की घरेलू बिक्री में 10.33 प्रतिशत की गिरावट और बारिश में 16.3 प्रतिशत की कमी यह संकेत देती है कि मौसम का असंतुलन सीधे तौर पर कृषि इनपुट की खपत को प्रभावित करता है। हालांकि, डीएपी की बिक्री का 10.3 लाख टन पर स्थिर रहना और सीजन की शुरुआत में किसानों द्वारा किया गया अग्रिम भंडारण इस बात की पुष्टि करता है कि खरीफ फसलों के लिए बुनियादी पोषण में कोई बड़ा व्यवधान नहीं आया है।

आने वाले रबी सीजन के लिए सबसे बड़ी चुनौती अंतरराष्ट्रीय बाजार में सल्फर (262%) और फॉस्फोरिक एसिड जैसी सामग्रियों की बढ़ती कीमतें होंगी, जिसका असर सरकारी सब्सिडी बिल और घरेलू उत्पादन पर पड़ सकता है; ऐसे में सस्ते आयातित यूरिया का बफर स्टॉक तैयार रखना सरकार का एक रणनीतिक कदम साबित होगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1. अगस्त में भारत में उर्वरकों की कुल बिक्री में कितनी गिरावट दर्ज की गई?

उत्तर: अगस्त में भारत में कुल घरेलू उर्वरक बिक्री सालाना आधार पर 10.33 प्रतिशत घटकर 65.1 लाख टन रह गई।

Q2. उर्वरक बिक्री घटने का मुख्य कारण क्या रहा?

उत्तर: अगस्त के दौरान देश भर में संचयी वर्षा सामान्य से 16.3 प्रतिशत कम रही, जिसके कारण खेतों में टॉप-ड्रेसिंग और खाद की तात्कालिक मांग प्रभावित हुई।

Q3. वैश्विक बाजार में किन कच्चे मालों के दाम सबसे ज्यादा बढ़े?

उत्तर: सल्फर की अंतरराष्ट्रीय कीमतें सालाना आधार पर 262 प्रतिशत बढ़ीं, जबकि अमोनिया 23 प्रतिशत और फॉस्फोरिक एसिड की कीमतों में 18 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

Q4. आयातित यूरिया की अंतरराष्ट्रीय कीमत क्या रही?

उत्तर: आयातित यूरिया की औसत कीमत 23.54 प्रतिशत घटकर 406 डॉलर प्रति टन पर आ गई, जिससे भारत ने अगस्त में करीब 7 लाख टन यूरिया का आयात किया।

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