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रिकॉर्ड उत्पादन के बावजूद चीनी मिलों पर गहराया वित्तीय संकट, ISMA ने सरकार से की बड़ी मांग

08/04/2026 by krishijagriti5

रिकॉर्ड उत्पादन के बावजूद चीनी मिलों पर गहराया वित्तीय संकट, ISMA ने सरकार से की बड़ी मांग

देश के चीनी उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की गई है। इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (इस्मा) के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, 31 मार्च तक देश का कुल चीनी उत्पादन लगभग 9 प्रतिशत बढ़कर 272.31 लाख टन तक पहुँच गया है। जबकि, पिछले वर्ष की इसी अवधि के दौरान देश में 248.78 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था।

उत्पादन में इस उछाल के बावजूद चीनी उद्योग फिलहाल गहरे वित्तीय संकट के दौर से गुजर रहा है। बढ़ती उत्पादन लागत और चीनी की कम एक्स-मिल कीमतों ने मिलों की नकदी स्थिति को बुरी तरह प्रभावित किया है। इस आर्थिक दबाव का सीधा असर अब किसानों पर दिखने लगा है, क्योंकि मिलों के पास गन्ना भुगतान का बकाया बढ़ता जा रहा है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

मौजूदा संकट से निपटने के लिए इस्मा ने सरकार से चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य में तत्काल वृद्धि की मांग की है। उद्योग का मानना है कि लागत के अनुरूप कीमतें तय होने से मिलों की वित्तीय सेहत सुधरेगी और वे किसानों का समय पर भुगतान सुनिश्चित कर सकेंगे। इसके साथ ही, गन्ने को एथेनॉल उत्पादन के लिए अधिक उपयोग (डायवर्जन) करने पर भी जोर दिया जा रहा है, जिससे बाज़ार में चीनी की अधिकता कम होगी और मिलों की आय के वैकल्पिक स्रोत मज़बूत होंगे।

चीनी मिलों का मौजूदा पेराई सत्र अब अपने अंतिम चरण में प्रवेश कर चुका है। आंकड़े बताते हैं कि वर्तमान में देश भर में केवल 56 मिलें ही संचालित हैं, जबकि पिछले वर्ष इसी समय 95 मिलें चल रही थीं। उत्तर प्रदेश जैसे प्रमुख उत्पादक राज्य में उत्पादन 87.5 लाख टन के स्तर पर स्थिर बना हुआ है, जो राष्ट्रीय स्तर पर आपूर्ति और मांग के संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

उद्योग जगत का मानना है कि केवल समय पर मिलने वाला नीतिगत समर्थन ही इस क्षेत्र को दीर्घकालिक स्थिरता प्रदान कर सकता है। अतिरिक्त चीनी की समस्या को एथेनॉल के माध्यम से हल करने और एमएसपी में सुधार करने से न केवल मिलों का भविष्य सुरक्षित होगा, बल्कि करोड़ों गन्ना किसानों के हितों की रक्षा भी सुनिश्चित की जा सकेगी।

यह भी पढ़े: भारत में चीनी उत्पादन 9% बढ़ा, फिर भी क्यों बंद हो रही हैं मिलें?, जाने वैश्विक चीनी बाजार का हाल

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