केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि भारत को बागवानी क्षेत्र को अधिक लाभकारी और आत्मनिर्भर बनाकर फलों, सब्जियों और फूलों के आयात को समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। आईसीएआर-भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान में आयोजित समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए बागवानी में आत्मनिर्भरता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसान तभी नई फसलों को अपनाएंगे जब वे आर्थिक रूप से लाभकारी हों।
उन्होंने कहा कि किसान तभी नई और उच्च मूल्य वाली फसलों को अपनाएंगे, जब उन्हें स्पष्ट आर्थिक लाभ दिखाई देगा। भारत प्रतिवर्ष 1120 लाख टन से अधिक फलों का उत्पादन करता है, जिसमें केला, आम, पपीता और साइट्रस प्रमुख हैं। इसके बावजूद शहरी मांग और मौसमी उपलब्धता में अंतर के कारण सेब, एवोकाडो, कीवी और नाशपाती जैसे फलों का आयात जारी है। केवल सेब का आयात ही करीब 6 लाख टन सालाना है, जबकि देश में इसका उत्पादन 25 से 27 लाख टन के बीच रहता है।
मंत्री ने कहा कि एवोकाडो और ड्रैगन फ्रूट जैसे आयातित फलों पर निर्भरता अब घटने लगी है। कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गुजरात और महाराष्ट्र में इनकी खेती का तेजी से विस्तार हो रहा है। विशेष रूप से ड्रैगन फ्रूट, जो कभी बड़े पैमाने पर आयात होता था, अब देश में व्यावसायिक स्तर पर उगाया जा रहा है और इसकी उत्पादकता भी उत्साहजनक है।
उन्होंने संकेत दिया कि उच्च मूल्य वाली बागवानी फसलों में आयात प्रतिस्थापन की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं और यदि अनुसंधान, प्रसंस्करण, विपणन और निर्यात को समन्वित रूप से बढ़ावा दिया जाए तो यह क्षेत्र किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ विदेशी मुद्रा की बचत में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
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