पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अब भारत के उर्वरक क्षेत्र खासकर यूरिया उत्पादन पर दिखने लगा है। गैस आपूर्ति में आई बाधाओं के कारण उत्पादन पर गंभीर प्रभाव पड़ा है। समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, ईंधन की कमी के चलते देश के कई यूरिया संयंत्रों को उत्पादन घटाना पड़ा है, जिससे कुल उत्पादन लगभग 50 प्रतिशत तक कम हो गया है।
सूत्रों के मुताबिक, उर्वरक इकाइयों को मिलने वाली गैस आपूर्ति सामान्य स्तर से 60 से 65 प्रतिशत तक घट गई है। एक वरिष्ठ उद्योग अधिकारी ने बताया कि जब निर्धारित रखरखाव (टर्नअराउंड) अवधि को भी शामिल किया जाता है, तो कुछ संयंत्रों में प्रभावी गैस उपलब्धता 50 प्रतिशत से भी नीचे चली जाती है।
यूरिया उत्पादन में आई यह गिरावट ऐसे समय में सामने आई है, जब देश में खरीफ सीजन की तैयारी चल रही है और उर्वरकों की मांग बढ़ने वाली है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गैस आपूर्ति में यह व्यवधान लंबे समय तक जारी रहता है, तो उर्वरक उपलब्धता और कीमतों पर असर पड़ सकता है, जिससे कृषि क्षेत्र पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
पश्चिम एशिया का संकट अब केवल एक कूटनीतिक मुद्दा नहीं रहा, बल्कि यह भारत की खाद्य सुरक्षा के लिए एक बड़ी चेतावनी है। सरकार वैकल्पिक रास्तों और घरेलू गैस उत्पादन को बढ़ाने की कोशिश कर रही है, लेकिन जब तक युद्ध के बादल नहीं छंटते, यूरिया का यह संकट गहराता रहेगा। युद्ध वहां हो रहा है, लेकिन उसकी आंच यहां हमारे खेतों तक पहुंच चुकी है। जरूरत है आत्मनिर्भरता की ओर एक और बड़े कदम की।
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