अंतर्राष्ट्रीय अनाज परिषद यानी आईजीसी ने 2025-26 के लिए वैश्विक खाद्यान्न उत्पादन के अनुमान में बड़ा संशोधन करते हुए इसे 310 लाख टन बढ़ाकर रिकॉर्ड 2.46 अरब टन कर दिया है। परिषद की मासिक रिपोर्ट मुख्य रूप से गेहूं और मक्का के उत्पादन में बढ़ोतरी का अनुमान है। आईजीसी ने वैश्विक गेहूं उत्पादन का अनुमान नवंबर में किए गए 8300 लाख टन से बढ़ाकर 8420 लाख टन कर दिया है।
इसके साथ ही गेहूं की खपत को भी 8190 लाख टन से बढ़ाकर 8230 लाख टन आंका गया है। बढ़ी हुई आपूर्ति के चलते गेहूं का कैरीओवर स्टॉक 2750 लाख टन से बढ़कर 2830 लाख टन रहने की संभावना जताई गई है। मक्का के मोर्चे पर भी तस्वीर मजबूत हुई है। वैश्विक मक्का उत्पादन अब 1.31 अरब टन आंका गया है, जो पहले के करीब 1.30 अरब टन के अनुमान से अधिक है, जबकि इसकी खपत को संशोधित कर 1.30 अरब टन बताया गया है।
चावल उत्पादन का वैश्विक अनुमान 5430 लाख टन पर यथावत रखा गया है, हालांकि चावल की खपत को 10 लाख टन घटाकर 5380 लाख टन कर दिया गया है। तिलहनों में, वैश्विक सोयाबीन उत्पादन अब 4270 लाख टन आंका गया है, जो पहले के अनुमानों से थोड़ा अधिक है, जबकि इसकी खपत बढ़कर 4320 लाख टन होने की संभावना है। वैश्विक सोयाबीन व्यापार 1870 लाख टन पर स्थिर रहने का अनुमान है।
2.46 अरब टन का यह आंकड़ा हमें एक उम्मीद देता है कि भविष्य में कोई भूखा नहीं सोएगा। लेकिन इसके लिए सिर्फ उत्पादन बढ़ाना काफी नहीं है, बल्कि अनाज की हो रही बर्बादी को रोकना और सही तकनीक को छोटे किसानों तक पहुँचाना भी जरूरी है।
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