केंद्र सरकार ने जैविक चीनी यानी ऑर्गेनिक शुगर के निर्यात को लेकर एक महत्वपूर्ण नीतिगत फैसला लिया है, जो जैविक गन्ना उत्पादकों और शुगर मिलों के लिए नए अवसर खोल सकता है। सरकार ने प्रति वित्त वर्ष 50,000 टन तक जैविक चीनी के निर्यात की अनुमति दे दी है। इस संबंध में विदेश व्यापार महानिदेशालय ने आधिकारिक अधिसूचना जारी की है।
अधिसूचना के मुताबिक, जैविक चीनी का निर्यात निर्धारित 50,000 टन की वार्षिक सीमा के भीतर ही किया जा सकेगा और यह पूरी प्रक्रिया कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण द्वारा तय नियमों और शर्तों के अनुरूप होगी। यानी निर्यात के लिए प्रमाणन, ट्रेसबिलिटी और ऑर्गेनिक मानकों का पालन अनिवार्य रहेगा।
जैविक चीनी उस गन्ने से तैयार की जाती है, जिसकी खेती में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग बिल्कुल भी नहीं होता। गन्ने की बुवाई से लेकर कटाई, प्रसंस्करण और पैकेजिंग तक पूरी श्रृंखला में ऑर्गेनिक खेती के तय मानकों का पालन किया जाता है। ऐसे में यह फैसला उन किसानों के लिए खास महत्व रखता है, जो पहले से जैविक गन्ना उत्पादन या प्राकृतिक खेती अपना चुके हैं।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इस फैसले के बाद जैविक गन्ना उगाने वाले किसानों को चाहिए कि वे प्रमाणित ऑर्गेनिक उत्पादन पर ध्यान दें और संबंधित एजेंसियों के साथ पंजीकरण कराएं। वहीं शुगर मिलों के लिए यह अवसर है कि वे अलग से ऑर्गेनिक चीनी की प्रोसेसिंग और ब्रांडिंग पर निवेश करें, ताकि निर्यात बाजारों में बेहतर मूल्य प्राप्त किया जा सके।
उद्योग जगत का मानना है कि यह कदम न सिर्फ भारत के जैविक कृषि निर्यात को नई रफ्तार देगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय ऑर्गेनिक चीनी की पहचान भी मजबूत करेगा। साथ ही, इससे किसानों को प्रीमियम दाम मिलने और गन्ने की जैविक खेती को बढ़ावा मिलने की भी उम्मीद है।
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