पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक अनिश्चितता के बीच, भारत सरकार ने देशवासियों को खाद्य सुरक्षा के मोर्चे पर पूरी तरह आश्वस्त किया है। सरकार का स्पष्ट कहना है कि भारत के पास अनाज का इतना पर्याप्त भंडार है कि वह किसी भी अंतरराष्ट्रीय संकट या आपूर्ति बाधा का सामना आसानी से कर सकता है।
वर्तमान में देश के सरकारी गोदामों में लगभग 602 लाख टन खाद्यान्न उपलब्ध है। इस विशाल भंडार में 222 लाख टन गेहूं और 380 लाख टन चावल शामिल है। यह आंकड़ा केवल बड़ा ही नहीं है, बल्कि यह निर्धारित बफर मानकों से लगभग तीन गुना अधिक है, जो देश की खाद्य सुरक्षा को एक मज़बूत सुरक्षा कवच प्रदान करता है।
सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत गरीबों को मिलने वाला राशन निर्बाध रूप से जारी रहे। इसके साथ ही, बाजार में अनाज की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए ‘खुला बाजार बिक्री योजना’ का सहारा लिया जा रहा है। इसके जरिए सरकारी भंडार से अनाज बाजार में उतारकर कीमतों को उछलने से रोका जा रहा है।
राज्यों को भी विशेष निर्देश दिए गए हैं कि वे अपनी कल्याणकारी योजनाओं के लिए सब्सिडी वाले चावल का लाभ उठाएं। साथ ही, घरेलू बाजार में किसी भी प्रकार की कृत्रिम किल्लत रोकने के लिए जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को कहा गया है। आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत अब आपूर्ति की निगरानी पहले से कहीं ज्यादा कड़ी कर दी गई है।
उपभोक्ता मामले विभाग इस समय ‘रियल टाइम’ मोड में काम कर रहा है, जहाँ हर दिन कीमतों और स्टॉक की स्थिति का सूक्ष्म विश्लेषण किया जा रहा है। सरकार का यह समन्वित प्रयास सुनिश्चित करता है कि दुनिया के किसी भी कोने में तनाव हो, भारत की रसोई पर उसका असर न पड़े और अनाज की उपलब्धता हर नागरिक के लिए बनी रहे।
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