पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण एलएनजी की आपूर्ति प्रभावित होने के चलते भारत ने चीन से सीमित मात्रा में यूरिया निर्यात की अनुमति देने का अनुरोध किया है। आपको बता दें कि एलएनजी यूरिया उत्पादन के लिए एक प्रमुख कच्चा माल है और इसकी आपूर्ति में व्यवधान घरेलू उर्वरक उत्पादन को प्रभावित कर सकता है।
अधिकारियों के अनुसार अमेरिका, इज़राइल और ईरान से जुड़े संघर्ष के कारण गैस आपूर्ति में आई बाधाओं ने भारत के कुछ उर्वरक संयंत्रों को उत्पादन घटाने के लिए मजबूर कर दिया है। इसी स्थिति को देखते हुए भारत ने चीन से यूरिया निर्यात पर लगे प्रतिबंधों में ढील देने का आग्रह किया है।
दुनिया का सबसे बड़ा यूरिया उत्पादक चीन अपने यूरिया निर्यात को कोटा प्रणाली के माध्यम से नियंत्रित करता है। पिछले वर्ष चीन ने कुछ देशों को सीमित मात्रा में यूरिया निर्यात की अनुमति दी थी, जिसमें भारत भी शामिल था। हालांकि 2026 के लिए निर्यात कोटा अभी तक तय नहीं किए गए हैं और इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है।
हालांकि, फिलहाल भारत में उर्वरक की तत्काल कमी नहीं है, लेकिन देश दुनिया का सबसे बड़ा यूरिया आयातक है। यदि गैस आपूर्ति में व्यवधान जारी रहता है, तो जून में दक्षिण-पश्चिम मानसून के साथ शुरू होने वाले खरीफ सीजन से पहले अतिरिक्त आयात की जरूरत पड़ सकती है, जब उर्वरकों की मांग चरम पर होती है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार चालू वित्त वर्ष में भारत अब तक करीब 98 लाख टन यूरिया आयात कर चुका है और आने वाले महीनों में लगभग 17 लाख टन और आयात होने की संभावना है। पश्चिम एशिया से एलएनजी उपलब्धता में कमी के कारण स्थिति और जटिल हो गई है। फिलहाल उर्वरक संयंत्रों को उनकी आवश्यकता का लगभग 70 प्रतिशत गैस ही मिल पा रही है, जिसके चलते कुछ उत्पादकों को उत्पादन कम करना पड़ा है।
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