आलू की बंपर पैदावार के लिए खरपतवार नियंत्रण करना बहुत ज़रूरी है। खरपतवार, आलू की फसल का पोषण और पानी चुरा लेते हैं, जिससे पैदावार में भारी कमी आती है। आज के इस लेख में हम आलू की फसल में खरपतवार नियंत्रण के सबसे असरदार तरीकों पर चर्चा करेंगे। आलू की फसल में सकरी पत्तियों के साथ चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार भी पाए जाते हैं। लेकिन सकरी पत्तियों की तुलना में चौड़ी पत्तियों वाले खरपतवार अधिक होते हैं।
अगर आप आलू की खेती कर रहे हैं तो आपकी खेत में बथुआ, मोथा, सेंजी, वन सोया, हिरण खुरी, बन प्याजी, बन गेहूं, जंगली जई, चौलाई, कृष्ण नील, मकोय, दूब घास, पत्थरचट्टा, कासनी, अंकरी, आदि खरपतवारों की समस्या ज्यादा होती है। समय रहते अगर इन्हे नष्ट नहीं किया गया तो फसलों की पैदावार एवं गुणवत्ता में भारी कमी आ सकती है।
आलू के खेत में खरपतवार पर नियंत्रण के लिए कुछ समय के अंतराल पर निराई-गुड़ाई करते रहें। आलू की बुवाई के 20 से 30 दिन बाद और फिर 40 से 50 दिन बाद हल्की निराई-गुड़ाई करने से खरपतवारों को आसानी से हटाया जा सकता है। यह मिट्टी को हवादार बनाने में भी मदद करता है।
आलू की फसल पर मिट्टी चढ़ाने से भी छोटे-मोटे खरपतवार दब जाते हैं और उनका जमाव कम हो जाता है। आलू की फसल में खरपतवारों पर तेजी से और प्रभावी नियंत्रण के लिए किसान भाई आमतौर पर रासायनिक नियंत्रण यानी खरपतवारनाशक का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन इसका प्रयोग सही समय और सही तरीके से करना चाहिए।
ध्यान रहे खरपतवारनाशक का प्रयोग करते समय इस बात का ध्यान रखें कि आलू के खेत में पर्याप्त मात्रा में नमी हो। नमी की कमी होने पर खरपतवारनाशक का असर कम हो सकता है। पहले समय पर निराई-गुड़ाई करके ही खरपतवार नियंत्रण करने का प्रयास करें और जरूरत पड़ने पर ही खरपतवारनाशक का उपयोग करें।
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