कम सिंचाई व लागत से अन्य फसलों की अपेक्षा अधिक लाभ के कारण सरसों की खेती किसानों के लिए बहुत ही लोकप्रिय होती जा रही है। लेकिन इस फसल में लगने वाले रोगों के कारण कई बार पीले सरसों की चमक काली पड़ जाती है।
सरसों की फसल में लगने वाले रोग बहुत नुकसान कर रहे तो अब परेशान होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि अब किसान भाई गैलवे कृषम के इन जैविक उत्पादों का इस्तेमाल करके सरसों की फसल में लगने वाले रोगों से बचा सकते हैं, तो आइए जानते हैं कैसे..!
नया साल दस्तक दे चुका है और मौसम ने भी अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है। आज आप जहां तक अपनी नजर दौड़ाते है, खेतों में कई फसलें लहलहाती नजर आती है और अगर आप सरसों के खेत में खड़े है तो फिर कहने ही क्या..! हरी मखमली सतह पर बिछी पीली चादर नजर को मोह लेती है। पर इस पीली चादर पर अक्सर कई तरह के रोग भी लगते है जो किसान की खुशी को बदरंग कर देते है।
लेकिन फसल की सही देखभाल और गैलवे कृषम के जैविक उत्पादों का इस्तेमाल करके किसान भाई अपनी सरसों की फसल को कई रोगों को लगने से बचा सकते हैं। वे कौन से रोग है और कैसे आप गैलवे कृषम के जैविक उत्पादों का इस्तेमाल करेंगे तो आइए जानते हैं..!
सरसों की फसल में लगने वाले रोग और गैलवे कृषम के जैविक उत्पादों से उपचार..!
सफेद रोली जिसे वाइट रस्ट भी कहां जाता है, सरसों का एक कॉमन रोग है। यह रोग सरसों की बुवाई के 30 से 40 दिनों के बाद पौधों की पत्तियों पर उभरे हुए फफोले दिखाई देते हैं।
इस रोग से सरसों की फसल को बचाने के लिए फसल बोने से पहले सरसों के बीज को उपचार जरूर करें। बीज उपचार करने के लिए प्रति किलोग्राम सरसों के बीज को 10 मिली जी-बायो फॉस्फेट एडवांस को मिलाकर 15 से 20 मिनट तक किसी छायादार स्थान पर हवा लगने के बाद मुलायम मिट्टी या राख में मिलकर मुख्य खेत में बुवाई करें। इससे सरसों के बीज जनित रोग से फसल का बचाव हो जाता हैं।
स्केलेरोटीनिया या तना सड़न एक ऐसा रोग है जो सामान्यतः सरसों की फसल को काफी नुकसान पहंचाता है। इस रोग से ग्रस्त सरसों के पौधों का तना सड़ने लगता है। सरसों की फसल को इस रोग से बचाव के लिए गैलवे कृषम के जैविक उत्पाद जी-बायो फॉस्फेट एडवांस को 15 लीटर पानी के टैंक में 10 मिली मिलाकर स्प्रे करें।
इसके अलावा अन्य रोगों से बचाव के लिए बुवाई के 50 से 60 दिनों बाद कर्बोनडाजीम 12% + मेकौजेब 63% के मिश्रण का 02% के घोल का सरसों की फसल पर छिड़काव कर सकते हैं। यदि किसानों को सरसों की खड़ी फसल में तना सड़न रोग दिखाई देता है तो उपयुक्त उपचार वीडियो में बताएं अनुसार कर सकते हैं। आवश्यकतानुसार बेहतर परिणाम के लिए 10 दिन के अंतराल पर 15 मिली जी-बायो फास्फेट एडवांस को 15 लीटर पानी के टैंक में मिलाकर स्प्रे को दोहरा सकते हैं।
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