आज हम बात करेंगे आलू की खेती के सबसे ज़रूरी कदम के बारे में- बीज उपचार। आलू के बीजों का सही उपचार न केवल फसल को रोगों से बचाता है, बल्कि उत्पादन भी बढ़ाता है। तो आइए जानते हैं कि यह कैसे करना है। बुवाई से पहले आलू के बीज को उपचारित करना बेहद आवश्यक है। बीज उपचारित करने के कई फायदे होते हैं।
यदि आप इन फायदों से अनजान हैं तो कृषि जागृति के इस लेख से बीज उपचारित करने के फायदे जान सकते हैं। इसके साथ ही इस लेख में बताई गई दवाओं से आलू की बीज उपचारित कर के आप रोग रहित आलू की फसल प्राप्त कर सकते हैं।
आलू के बीज उपचारित करने के लाभ
आलू के बीज उपचारित करने से फसल को कई तरह के मृदा जनित रोगों से बचाया जा सकता है। आलू के उपचारित बीज की बुवाई करने से उच्च गुणवत्ता की फसल प्राप्त होती है। बीज उपचार करने से कई तरह के कीटों से भी फसलों की रक्षा होती है।
आलू के बीज उपचारित करने की सही विधि
आलू के बीज को बुवाई से करीब 24 घंटे पहले उपचारित करना चाहिए। यदि बीज कंदो का आकार बड़ा है तो उपचारित करने से पहले इसकी कटाई करें। प्रति किलोग्राम आलू के बीज को 10 मिली जी-बायो फॉस्फेट एडवांस को एक लीटर पानी में मिलाकर उपचारित करें।
इसके अलावा आप प्रति किलोग्राम बीज को 10 मिली जी-डर्मा प्लस को एक लीटर पानी में मिलाकर भी उपचारित कर सकते हैं। तैयार घोल में आलू के बीजों को 10 से 15 मिनट तक डुबोकर रखें। इस बात का ध्यान रखें कि घोल आलू के सभी हिस्सों पर अच्छे से लग जाए।
उपचार के बाद आलू के बीजों को छायादार स्थान पर अच्छी तरह से सुखा लें। इन्हें सीधे धूप में न रखें। बीज पूरी तरह सूखने के बाद 24 घंटे के अंदर इसकी बुवाई कर दें। तो देखा आपने, यह आसान प्रक्रिया आपके आलू की फसल के लिए कितनी ज़रूरी है! बीज उपचार से, अंकुरण अच्छा होता है, पौधे स्वस्थ रहते हैं, भूमि और बीज जनित रोगों से बचाव होता है, उत्पादन में वृद्धि होती है।
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