केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों से बजट उपयोग को लेकर अधिक रणनीतिक और समयबद्ध दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि आवंटित धनराशि के खर्च में देरी का सीधा नुकसान राज्यों को ही उठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि समय पर बजट उपयोग न होने से न केवल योजनाओं का जमीनी असर कमजोर पड़ता है, बल्कि केंद्र से मिलने वाली अगली किस्तों की समय पर रिहाई भी प्रभावित होती है।
राज्य कृषि मंत्रियों के साथ आयोजित समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए चौहान ने कहा कि राज्यों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि विभिन्न केंद्रीय योजनाओं के तहत आवंटित राशि मार्च से पहले पूरी तरह खर्च हो जाए, ताकि वित्तीय वर्ष के अंत में प्रशासनिक अड़चनों के कारण कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में देरी न हो। उन्होंने कहा, “यदि राज्य समय पर अपने बजट का उपयोग नहीं कर पाते हैं, तो इसका नुकसान उन्हीं को होता है। कई बार छोटी-छोटी प्रशासनिक और प्रक्रियात्मक बाधाएं पूरे आवंटन को अटका देती हैं।”
बैठक में प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना और कृषोन्नति योजना सहित प्रमुख केंद्रीय कृषि योजनाओं की प्रगति और बजट उपयोग की विस्तृत समीक्षा की गई। केंद्रीय मंत्री ने पीएम-किसान योजना के तहत पात्र किसानों के शीघ्र सत्यापन पर विशेष जोर देते हुए कहा कि लाभार्थियों की समय पर पुष्टि से भुगतान में देरी से बचा जा सकता है। साथ ही, उन्होंने फसल बीमा योजना के दायरे के विस्तार और बीमा दावों के समयबद्ध निपटान को किसानों का भरोसा बनाए रखने के लिए अहम बताया।
चौहान ने बीज और उर्वरकों की उपलब्धता, उनके संतुलित और विवेकपूर्ण उपयोग, तथा केंद्र- राज्य समन्वय को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उनके अनुसार, बेहतर समन्वय से न केवल संसाधनों का कुशल उपयोग संभव है, बल्कि योजनाओं का वास्तविक लाभ किसानों तक तेजी से पहुंचाया जा सकता है।
इस उच्चस्तरीय बैठक में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तराखंड और मिजोरम के कृषि मंत्री, कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी तथा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना रहा कि चालू वित्त वर्ष में योजनाओं की गति बनी रहे और किसान-केन्द्रित कार्यक्रमों का असर समय पर खेतों तक पहुंचे।
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