USDA का अनुमान: भारत में चीनी उत्पादन 14% घटकर 2.95 करोड़ टन रहेगा, खपत से 13 लाख टन कम

अमेरिकी कृषि विभाग की विदेश कृषि सेवा (USDA-FAS) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, विपणन वर्ष 2026-27 में भारत का चीनी उत्पादन 14% घटकर 2.95 करोड़ टन रह सकता है, जो हाल के वर्षों का सबसे निचला स्तर होगा। देश में घरेलू चीनी की खपत 3.1 करोड़ टन रहने का अनुमान है, जिससे उत्पादन और खपत के बीच लगभग 13 लाख टन की सीधी कमी (Deficit) पैदा हो गई है। महाराष्ट्र में मौसम की मार और उत्तर प्रदेश में रेड बोरर कीट के हमले से सुक्रोज रिकवरी दर घटकर 8.6% रह गई है। जानिए घरेलू बाज़ार को संभालने के लिए सरकार के शुल्क-मुक्त आयात और स्टॉक नियमों का पूरा विवरण।

चीनी उत्पादन में 14% की भारी गिरावट

अमेरिकी कृषि विभाग की विदेश कृषि सेवा के अनुसार, विपणन वर्ष 2026-27 में भारत का चीनी उत्पादन 14% घटकर 2.95 करोड़ टन रह सकता है, जो हाल के वर्षों का सबसे निचला स्तर होगा। इसमें 2.76 करोड़ टन क्रिस्टल चीनी और 62,000 टन खांडसारी शामिल है। गन्ने का रकबा 1% से कम घटकर 59 लाख हेक्टेयर और कुल उत्पादन 6% गिरकर 43.4 करोड़ टन रहने का अनुमान है।

महाराष्ट्र में जलभराव और यूपी में रेड बोरर का असर

महाराष्ट्र के प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में शुष्क मौसम और बेमौसम जलभराव, जबकि उत्तर प्रदेश में रेड बोरर के प्रकोप ने गन्ने में सुक्रोज की मात्रा प्रभावित की है। इसके चलते चीनी रिकवरी दर 8.6% रहने का अनुमान है। घरेलू चीनी खपत 3.1 करोड़ टन रहने की संभावना है, जो अनुमानित उत्पादन से करीब 13 लाख टन अधिक है।

13 लाख टन की किल्लत और शुल्क-मुक्त आयात

मांग और आपूर्ति के बीच तीन वर्षों का सबसे बड़ा अंतर रहने की आशंका के चलते अंतिम स्टॉक अनुमान 65 लाख टन से घटाकर 40 लाख टन कर दिया गया है। घरेलू उपलब्धता बढ़ाने के लिए सरकार ने 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। बड़े थोक उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक रखने की अवधि भी 15 दिन तक सीमित की गई है।

2026-27 में चीनी का कुल आयात और निर्यात

विदेश कृषि सेवा के अनुसार, 2026-27 में कुल चीनी आयात 24.3 लाख टन रहने का अनुमान है, जिसमें 24 लाख टन कच्ची और 30,000 टन रिफाइंड चीनी शामिल है। इस दौरान निर्यात 31 लाख टन रहने का अनुमान है।

निष्कर्ष: भारत जैसे विशाल उपभोक्ता देश में चीनी उत्पादन का 14% गिरकर 2.95 करोड़ टन पर आना और घरेलू खपत के मुकाबले 13 लाख टन की खाई बनना कृषि और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए एक बड़ी चेतावनी है।

महाराष्ट्र में जलवायु विषमता और उत्तर प्रदेश में रेड बोरर का प्रकोप यह साबित करता है कि अब गन्ना किसानों को कीट-प्रतिरोधी नई किस्मों और वैज्ञानिक प्रबंधन की सख्त जरूरत है। सरकार द्वारा 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात और 15 दिन की स्टॉक सीमा तय करने जैसे कदमों से त्योहारी मांग में कीमतों को काबू में रखने में मदद मिलेगी, लेकिन आने वाले पेराई सत्र में रिकवरी और आपूर्ति पर पैनी नजर रखनी होगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1. USDA के अनुसार वर्ष 2026-27 में भारत का चीनी उत्पादन कितना रहने का अनुमान है?

उत्तर: अमेरिकी कृषि विभाग (USDA FAS) के अनुसार, भारत का कुल चीनी उत्पादन 14% घटकर 2.95 करोड़ टन (2.76 करोड़ टन क्रिस्टल चीनी) रहने का अनुमान है।

Q2. देश में चीनी की घरेलू खपत कितनी है और कितना अंतर आ रहा है?

उत्तर: घरेलू खपत लगभग 3.10 करोड़ टन रहने का अनुमान है, जो संभावित उत्पादन से लगभग 13 लाख टन अधिक है।

Q3. गन्ने से चीनी की रिकवरी दर घटकर कितनी रह गई है?

उत्तर: मौसम की विषमता और कीट प्रकोप के चलते मिलों में चीनी की रिकवरी दर घटकर लगभग 8.6% आंकी गई है।

Q4. चीनी की कमी को पूरा करने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?

उत्तर: सरकार ने 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है और बड़े थोक उपयोगकर्ताओं के लिए 15 दिनों की स्टॉक सीमा तय की है।

Q5. किन राज्यों में गन्ने की फसल सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है?

उत्तर: महाराष्ट्र में शुष्क मौसम व जलभराव और उत्तर प्रदेश में रेड बोरर कीट के प्रकोप से गन्ने की फसल और रस की गुणवत्ता बुरी तरह प्रभावित हुई है।

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