मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण खाड़ी देशों को भारत से होने वाला तरबूज और खरबूजे का निर्यात प्रभावित हो गया है। इसके चलते घरेलू बाजारों में आपूर्ति बढ़ गई है और कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिल रही है। निर्यात के लिए तैयार की गई फलों की खेप फिलहाल खाड़ी देशों को भेजी नहीं जा पा रही है, जिसके कारण उन्हें स्थानीय बाजारों की ओर मोड़ा जा रहा है।
निर्यात गुणवत्ता वाले फलों की अचानक बढ़ी आवक से घरेलू आपूर्ति बढ़ गई है और कीमतों पर दबाव आ गया है। कई मंडियों में तरबूज की कीमतों में 6 से 7 रुपय प्रति किलोग्राम तक गिरावट दर्ज की गई है।
देश की सबसे बड़ी फल एवं सब्जी थोक मंडी दिल्ली की आजादपुर मंडी में पिछले एक महीने के दौरान कीमतों में लगभग 29 प्रतिशत की कमी आई है और औसत भाव घटकर करीब 2,301 रुपय प्रति क्विंटल रह गया है।
व्यापारियों का कहना है कि निर्यात के लिए तैयार माल के घरेलू बाजारों में आने से मांग और आपूर्ति का संतुलन बिगड़ गया है। उनका मानना है कि जब तक खाड़ी देशों को निर्यात सामान्य नहीं होता, तब तक कीमतों पर दबाव बने रहने की संभावना है।
भू-राजनीतिक तनाव सीधे तौर पर भारतीय कृषि अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहा है। वर्तमान में घरेलू बाजार ‘निर्यात अधिशेष’ के बोझ तले दबा हुआ है। जब तक अंतरराष्ट्रीय रसद और खाड़ी देशों के साथ व्यापारिक मार्ग सामान्य नहीं होते, तब तक घरेलू मंडियों में तरबूज और खरबूजे के दाम निम्न स्तर पर बने रहने की संभावना है। यह स्थिति उपभोक्ताओं के लिए तो राहत भरी है, लेकिन किसानों के लिए एक अल्पकालिक वित्तीय चुनौती पेश करती है।
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