पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक व्यवधानों के बावजूद भारत का मक्का निर्यात सुधार के संकेत दे रहा है। मजबूत उत्पादन, प्रतिस्पर्धी कीमतों और वैश्विक मांग में बदलाव से निर्यात को समर्थन मिल रहा है।
अमेरिकी कृषि विभाग (यूएसडीए) ने भारत के मक्का निर्यात अनुमान को बढ़ाकर लगभग 3.5 लाख टन कर दिया है। वहीं अक्टूबर-दिसंबर 2025 के दौरान निर्यात करीब 4 लाख टन तक पहुंच चुका है, जो हाल के वर्षों की तुलना में लगभग दोगुना है।
भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ी हुई माल ढुलाई लागत के चलते वैश्विक खरीदार आपूर्ति स्रोतों में विविधता ला रहे हैं। इससे मक्का पशु चारे और औद्योगिक उपयोग के लिए एक वैकल्पिक जिंस के रूप में उभर रहा है।
भारत का मक्का उत्पादन 430 लाख टन से अधिक बना हुआ है और कमजोर रुपय ने निर्यात प्रतिस्पर्धा को और मजबूत किया है। हालांकि, इथेनॉल उत्पादन और पोल्ट्री फीड के लिए घरेलू मांग बढ़ने से निर्यात के लिए उपलब्धता सीमित हो सकती है।
वैश्विक स्तर पर मौसम संबंधी जोखिम और बायोफ्यूल की बढ़ती मांग के कारण आपूर्ति में कमी की स्थिति बन रही है। ऐसे में भारत क्षेत्रीय बाजारों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की बेहतर स्थिति में दिखाई दे रहा है।
पश्चिम एशिया का तनाव जहाँ कई क्षेत्रों के लिए चिंता का विषय है, वहीं भारत ने अपनी रणनीतिक स्थिति और बंपर पैदावार के दम पर कृषि निर्यात में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यदि सरकार बुनियादी ढांचे और लॉजिस्टिक्स में और सुधार करती है, तो भारत आने वाले समय में ‘मक्का निर्यात’ के वैश्विक केंद्र के रूप में उभर सकता है। यह न केवल देश के विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाएगा, बल्कि सीधे तौर पर भारतीय किसानों की आय में भी वृद्धि करेगा।
यह भी पढ़े: इफको के नैनो एनपीके उर्वरकों को मिली हरी झंडी..!
जागरूक रहिए व नुकसान से बचिए और अन्य लोगों के जागरूकता के लिए साझा करें एवं कृषि जागृति, स्वास्थ्य सामग्री, सरकारी योजनाएं, कृषि तकनीक, व्यवसायिक एवं जैविक खेती से संबंधित जानकारियां प्राप्त करने के लिए जुड़े कृषि जागृति चलो गांव की ओर से या कृषि संबंधित किसी भी समस्या के जैविक समाधान के लिए WhatsApp करें।
