भारत के चावल निर्यात में पिछले वर्ष 19.4 प्रतिशत की तेज़ बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे वैश्विक बाजारों में देश की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति फिर मजबूत हुई और निर्यात दूसरे सबसे ऊँचे रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया। कुल निर्यात 2024 के 180 लाख टन से बढ़कर 215 लाख टन हो गया, जो 2022 के शिखर स्तर 223 लाख टन के क़रीब है।
अधिकारियों का कहना है कि मार्च में निर्यात संबंधी आख़िरी पाबंदियाँ हटाए जाने और रिकॉर्ड घरेलू उत्पादन के चलते आपूर्ति बेहतर हुई, जिससे 2022-23 के दौरान लगाए गए नियंत्रणों के बाद भारतीय निर्यात की तेज़ रिकवरी संभव हो सकी। इस दौरान गैर-बासमती चावल का निर्यात 25 प्रतिशत बढ़कर 1.515 करोड़ टन हो गया, जिसे बांग्लादेश, बेनिन, कैमरून, आइवरी कोस्ट और जिबूती जैसे देशों से मजबूत मांग का सहारा मिला।
बासमती चावल के मोर्चे पर भी सकारात्मक रुझान रहा। इसका निर्यात 8 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 64 लाख टन पर पहुँच गया, जिसमें ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और यूनाइटेड किंगडम से बढ़ी खरीद का योगदान रहा।
भारतीय आपूर्ति में इस उछाल का असर वैश्विक बाजारों पर भी पड़ा है। इससे थाईलैंड और वियतनाम जैसे प्रतिस्पर्धी देशों के निर्यात पर दबाव आया और एशियाई चावल की कीमतें लगभग एक दशक के निचले स्तर पर पहुँच गईं। इससे अफ्रीका और अन्य कीमत संवेदनशील बाजारों के उपभोक्ताओं को राहत मिली है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक बना हुआ है और आम तौर पर थाईलैंड, वियतनाम और पाकिस्तान के संयुक्त निर्यात से भी अधिक चावल वैश्विक बाजारों में भेजता है।
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