महाराष्ट्र की अकोला मंडी में तुअर यानी अरहर के भावों में बीते सप्ताह उल्लेखनीय मजबूती दर्ज की गई। पिछले सप्ताह के मुकाबले कीमतें 275 रुपए प्रति क्विंटल चढ़कर 7,400 से 7,425 रुपए प्रति क्विंटल के स्तर पर पहुँच गईं। बाजार में यह तेजी मुख्य रूप से नई फसल की कमजोर आवक और कम नमी वाली, बेहतर गुणवत्ता की उपज के लिए दाल मिलों की बढ़ी हुई मांग के चलते देखने को मिली।
जनवरी में पोंगल जैसे प्रमुख त्योहारों से पहले मौसमी खरीदारी ने भी तुअर की मांग को सहारा दिया है। उद्योग संगठनों के मुताबिक, नई फसल की आवक उम्मीद से कम रहने के कारण बाजार में उपलब्धता पहले ही सीमित है। भारतीय दलहन एवं अनाज संघ का कहना है कि जैसे ही सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य 8,000 रुपय प्रति क्विंटल पर नई आवक की खरीद शुरू करेगी, खुले बाजार में तूर की आपूर्ति और सिमट सकती है, जिससे कीमतों को अतिरिक्त समर्थन मिलने की संभावना है।
हालांकि, आयात के जरिए कुछ आपूर्ति बनी हुई है, लेकिन म्यांमार से आई नई फसल की गुणवत्ता इस बार पिछले वर्ष के मुकाबले कमजोर बताई जा रही है। इसके चलते घरेलू बाजार में पुराने स्टॉक की मांग मजबूत बनी हुई है। कमजोर पैदावार के कारण नई खरीफ फसल की आवक अपेक्षा से कम है और मिलों व व्यापारियों की प्रोसेसिंग पाइपलाइन लगभग खाली स्थिति में बताई जा रही है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निकट अवधि में तुअर की कीमतों में और मजबूती की संभावना बनी हुई है। आने वाले हफ्तों में उपलब्धता और सख्त होने की आशंका के बीच बाजार को समर्थन मिलता रहने की उम्मीद जताई जा रही है।
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