केंद्र सरकार ने वर्ष 2022-23 से 2024-25 के दौरान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत प्याज उत्पादकों को 701.54 करोड़ रुपय के बीमा दावों का भुगतान किया है। कृषि मंत्रालय ने राज्यसभा में यह जानकारी देते हुए बताया कि इस अवधि में प्याज फसल बीमा के लिए 27.21 लाख किसान आवेदनों का नामांकन किया गया।
कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने लिखित उत्तर में कहा कि नामांकन और दावों के निपटान में महाराष्ट्र की हिस्सेदारी सबसे अधिक रही, जबकि कर्नाटक और आंध्र प्रदेश क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना प्राकृतिक आपदाओं और प्रतिकूल मौसम से होने वाले फसल नुकसान के खिलाफ वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती है। राज्य सरकारों द्वारा अधिसूचना जारी किए जाने पर प्याज को भी योजना के दायरे में शामिल किया जाता है। यह योजना बोआई-पूर्व से लेकर कटाई के बाद तक जोखिम कवर उपलब्ध कराती है और रियायती प्रीमियम दरों के माध्यम से किसानों को उत्पादन संबंधी झटकों से बचाने का उद्देश्य रखती है।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि प्याज उत्पादकों के लिए यह बीमा सहायता व्यापक सुरक्षा रणनीति का हिस्सा है, क्योंकि यह फसल जलवायु जोखिम और मूल्य अस्थिरता दोनों से प्रभावित होती है। किसानों की आय स्थिर रखने के लिए बाजार हस्तक्षेप, बफर स्टॉक संचालन और कटाई के बाद अवसंरचना विकास जैसे अतिरिक्त उपाय भी लागू किए जा रहे हैं।
सरकार का लक्ष्य केवल नुकसान की भरपाई करना ही नहीं, बल्कि बफर स्टॉक प्रबंधन और बाजार हस्तक्षेप के जरिए प्याज की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव से किसानों को बचाना भी है। 1,27,290 करोड़ रुपए के भारी-भरकम कृषि बजट के साथ, अब खेती को और अधिक सुरक्षित बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
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