केरल में 26 मई तक पहुंच सकता है मानसून: IMD

मौसम विभाग ने इस साल मानसून के आगमन को लेकर बड़ी भविष्यवाणी की है। विभाग के मुताबिक, इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून अपने आगमन की सामान्य तिथि 1 जून से करीब छह दिन पहले, यानी 26 मई तक केरल के तट पर दस्तक दे सकता है।मौसम विभाग के आधिकारिक बयान के अनुसार, मानसून का आगमन पूर्वानुमान से 4 दिन पहले या बाद में भी हो सकता है।

यह पूर्वानुमान उन चिंताओं के बीच आया है, जिसमें इस साल सामान्य से कम बारिश और ‘एल नीनो’ के मजबूत होने की आशंका जताई जा रही है। भारत की मुख्यभूमि में मानसून का प्रवेश वर्षा ऋतु की औपचारिक शुरुआत माना जाता है।

मौसम विभाग के मानसून के आगमन के बारे में पिछले दो दशकों का रिकॉर्ड देखें तो विभाग के ये पूर्वानुमान काफी सटीक रहे हैं, सिवाय साल 2015 के जब गणना में थोड़ा अंतर आया था। मानसून की यह शुरुआती तेजी भारतीय किसानों के लिए काफी मायने रखती है। देश के लगभग आधे खेती योग्य क्षेत्र में सिंचाई पूरी तरह वर्षा पर निर्भर है।

वक्त से पहले बारिश शुरू होने से खरीफ की मुख्य फसलों की बुवाई समय पर हो सकेगी। धान, सोयाबीन, कपास, दालें और मक्का उगाने वाले किसानों के लिए यह खबर उत्साहजनक है। हालांकि, कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि केवल समय पर आना ही काफी नहीं है, बल्कि पूरी फसल अवधि के दौरान बारिश का निरंतर वितरण भी उतना ही जरूरी है।

निष्कर्ष: भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून अपनी सामान्य तिथि से छह दिन पहले, यानी 26 मई तक केरल के तट पर दस्तक दे सकता है, जिससे देश में वर्षा ऋतु की शुरुआती तेजी देखने को मिलेगी।

हालांकि, ‘एल नीनो’ के मजबूत होने के कारण सामान्य से कम बारिश की आशंका जताई जा रही है, फिर भी समय से पहले मानसून का आना भारतीय किसानों के लिए राहत भरा है क्योंकि इससे धान, कपास और सोयाबीन जैसी मुख्य खरीफ फसलों की बुवाई समय पर हो सकेगी।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून का समय पर आना किसानों के लिए उत्साहजनक ज़रूर है, लेकिन फसलों की अच्छी पैदावार के लिए पूरी अवधि के दौरान बारिश का लगातार और समान रूप से वितरित होना सबसे अधिक महत्वपूर्ण होगा।

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