कुफरी बहार आलू के टिश्यू कल्चर उत्पादन को मिली मंजूरी

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान ने आलू किसानों को एक बहुत बड़ी राहत दी है। संस्थान ने आलू की सबसे मशहूर और मांग वाली किस्म ‘कुफरी बहार’ के टिश्यू कल्चर आधारित बीज गुणन (मल्टीप्लिकेशन) को फिर से अपनी मंजूरी दे दी है। इस अहम फैसले से देशभर के उन किसानों की परेशानी हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी, जो लंबे समय से रोगमुक्त और गुणवत्तापूर्ण बीजों की किल्लत झेल रहे थे।

संस्थान के निदेशक ब्रजेश सिंह ने कहा कि यह पहल खासकर उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए किसी गेम चेंजर से कम नहीं होगी। टिश्यू कल्चर तकनीक की मदद से अब लैब के अंदर बहुत ही कम समय में, बड़े पैमाने पर उच्च गुणवत्ता वाले बीज तैयार किए जा सकेंगे। आपको बता दें कि यूपी के कुल आलू उत्पादन क्षेत्र में 70 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सेदारी सिर्फ ‘कुफरी बहार’ किस्म की ही है।

इस नई और आधुनिक प्रक्रिया के शुरू होने से बीज आपूर्ति श्रृंखला में आने वाली सारी रुकावटें दूर हो जाएंगी और किसानों को बुवाई के सही समय पर बीज मिल सकेंगे। इससे न सिर्फ फसल एकसमान होगी और आलू की पैदावार बढ़ेगी, बल्कि प्रति एकड़ बेहतर उत्पादन मिलने से किसानों की आर्थिक स्थिति भी काफी मजबूत होगी।

इस पूरी कार्ययोजना को धरातल पर उतारने के लिए हाल ही में एक उच्च स्तरीय बैठक भी हुई, जिसमें मोदिपुरम, ग्वालियर, पटना, जालंधर और कुफरी-फागू समेत कई क्षेत्रीय केंद्रों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इन सभी ने मिलकर एक ऐसी आधुनिक रणनीति बनाई है, जिससे भविष्य में देश के किसी भी कोने में गुणवत्तापूर्ण आलू बीजों की कमी नहीं होगी और किसान पूरी तरह से वैज्ञानिक तरीके से खेती कर सकेंगे।

निष्कर्ष: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान द्वारा आलू की सबसे लोकप्रिय किस्म ‘कुफरी बहार’ के टिश्यू कल्चर आधारित बीज गुणन को दोबारा मंजूरी देना कृषि क्षेत्र में, विशेषकर उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए, एक क्रांतिकारी कदम है।

टिश्यू कल्चर तकनीक के माध्यम से अब प्रयोगशाला में ही कम समय में बड़े पैमाने पर रोगमुक्त और उच्च गुणवत्ता वाले बीजों का उत्पादन संभव हो सकेगा, जिससे बाजार में बीजों की किल्लत और आपूर्ति की बाधाएं पूरी तरह समाप्त हो जाएंगी।

देश के विभिन्न क्षेत्रीय केंद्रों की सहभागिता से तैयार की गई इस आधुनिक और वैज्ञानिक रणनीति से न केवल आलू की पैदावार और फसल की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि किसानों को समय पर बीज मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति भी काफी मजबूत होगी।

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