भारत में जनवरी महीने के दौरान चाय उत्पादन में तेज गिरावट दर्ज की गई है। भारतीय चाय बोर्ड के अस्थायी आंकड़ों के अनुसार, उत्पादन सालाना आधार पर 15 प्रतिशत से अधिक घटकर 145.0 लाख किलोग्राम रह गया, जबकि पिछले वर्ष जनवरी में यह 171.5 लाख किलोग्राम था। यह गिरावट मुख्य रूप से दक्षिण भारत के चाय उत्पादक क्षेत्रों में उत्पादन में आई तीव्र कमी के कारण हुई है।
दक्षिण भारत में उत्पादन लगभग 28 प्रतिशत घटकर 123.5 लाख किलोग्राम रह गया। तमिलनाडु में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई, जहां उत्पादन 118.4 लाख किलोग्राम से घटकर 77.0 लाख किलोग्राम रह गया, जो करीब 35 प्रतिशत कम है। इसके विपरीत उत्तर भारत में उत्पादन में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला। क्षेत्रीय उत्पादन बढ़कर 21.5 लाख किलोग्राम हो गया।
जबकि पिछले वर्ष यह केवल 70,000 किलोग्राम था। असम में उत्पादन 30,000 किलोग्राम से बढ़कर 5.60 लाख किलोग्राम हो गया, जिसमें असम वैली का योगदान 5.30 लाख किलोग्राम रहा। इसी तरह पश्चिम बंगाल में भी उत्पादन बढ़कर 14.7 लाख किलोग्राम हो गया, जो पिछले वर्ष के 30,000 किलोग्राम से काफी अधिक है।
हालांकि उत्तर भारत में उत्पादन सुधार दर्ज किया गया है, लेकिन दक्षिण भारत में आई तेज गिरावट के कारण देश का कुल चाय उत्पादन प्रभावित हुआ है। इससे स्पष्ट होता है कि भारत के कुल चाय उत्पादन में दक्षिणी बागानों की भूमिका अभी भी निर्णायक बनी हुई है।
देश के समग्र चाय उत्पादन में 15 प्रतिशत से अधिक की कमी आई है। यह दर्शाता है कि उत्तर भारत में हुई वृद्धि, दक्षिण भारत में हुए नुकसान की भरपाई करने के लिए पर्याप्त नहीं थी। जनवरी के दौरान उत्तर और दक्षिण भारत के उत्पादन रुझानों में विपरीत स्थिति देखी गई। जहाँ दक्षिण में भारी गिरावट रही, वहीं उत्तर भारत (असम और पश्चिम बंगाल) में उत्पादन के आंकड़ों में असाधारण सुधार हुआ।
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