अंतरराष्ट्रीय बाजार में मिथिला मखाना की मांग बढ़ी, भारत का निर्यात 7,000 टन पार

तालाबों और दलदली खेतों से निकलकर दुनिया के 20 से अधिक देशों में ‘सुपरफूड’ बनकर छा जाने वाले मिथिला मखाने ने इस साल 7,000 टन निर्यात का नया इतिहास रच दिया है। क्या आप जानते हैं कि केंद्र सरकार की ₹476 करोड़ की नई योजना और अलग एचएस कोड से छोटे मखाना उत्पादक किसानों की जेब में कितना सीधा मुनाफा पहुंचने वाला है?

वैश्विक बाजार में मखाना निर्यात का रिकॉर्ड

बिहार के जीआई टैग प्राप्त ‘मिथिला मखाना’ की अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मांग बढ़ रही है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने 20 से अधिक देशों के बाजारों में 7,000 टन से अधिक मखाना और मूल्यवर्धित उत्पादों का निर्यात किया। देश के कुल मखाना उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी करीब 85% है। स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता, मखाना आधारित एग्री-स्टार्टअप्स और किसान उत्पादक संगठनों की सक्रियता से इसकी वैश्विक पहुंच मजबूत हुई है।

अलग एचएस कोड और राष्ट्रीय मखाना बोर्ड

मखाना क्षेत्र में व्यापार और निर्यात आंकड़ों की निगरानी बेहतर बनाने के लिए केंद्र सरकार ने जुलाई 2025 में इसके लिए अलग हार्मोनाइज्ड सिस्टम (एचएस) कोड लागू किया। इसके बाद सितंबर 2025 में राष्ट्रीय मखाना बोर्ड का गठन किया गया।

₹476 करोड़ की केंद्रीय योजना का खाका

क्षेत्र के समग्र विकास के लिए सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक 476.03 करोड़ रुपये की केंद्रीय योजना को मंजूरी दी है। इसके तहत 2025-26 के लिए 30 करोड़ रुपये और 2026-27 के लिए 90 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

मखाना किसानों के लिए नए अवसर

योजना में अनुसंधान, गुणवत्तापूर्ण बीजों के वितरण, किसानों के प्रशिक्षण और कटाई के बाद की व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। साथ ही, मखाना प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग और निर्यात को बढ़ावा देने की पहल की जा रही है। इन प्रयासों का उद्देश्य भारतीय मखाना की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना, उत्पाद की गुणवत्ता सुधारना और किसानों के लिए बाजार के नए अवसर तैयार करना है।

मखाना उत्पादक किसानों के लिए 3 जरूरी बातें

कच्चा बीज बेचने के बजाय प्राथमिक प्रोसेसिंग अपनाएं: व्यापारी को कच्चा गुड़ी (मखाना बीज) बेचने के बजाय अगर किसान समूह (FPO) बनाकर प्राथमिक ग्रेडिंग और भूनने (Popping) का काम करें, तो उन्हें प्रति किलो 40 से 50% अधिक मुनाफा मिल सकता है।

राष्ट्रीय मखाना बोर्ड की सब्सिडी का लाभ उठाएं: केंद्र की ₹476 करोड़ की योजना के तहत आधुनिक ड्रायर, ग्रेडर और स्टोरेज के लिए भारी वित्तीय सहायता दी जा रही है; अपने जिले के कृषि कार्यालय या मखाना बोर्ड से संपर्क करें।

जीआई (GI) टैग और जैविक प्रमाणन से जुड़ें: ‘मिथिला मखाना’ के आधिकारिक जीआई टैग और ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन से जुड़े उत्पादों को अमेरिका, यूरोप और खाड़ी देशों में प्रीमियम कीमतें मिलती हैं।

निष्कर्ष: मिथिला मखाना का 7,000 टन से अधिक का निर्यात यह साबित करता है कि पारंपरिक फसलें भी सही ब्रांडिंग और नीतिगत सहयोग से वैश्विक पहचान बना सकती हैं। राष्ट्रीय मखाना बोर्ड और ₹476 करोड़ की केंद्रीय योजना का लाभ यदि सीधे खेत और तालाब स्तर के किसानों तक पहुंचे, तो यह पहल बिहार के ग्रामीण अर्थतंत्र को नई ऊंचाई देगी।

अस्वीकरण (Disclaimer): यह विश्लेषणात्मक रिपोर्ट Anil Kumar Prasad द्वारा आधिकारिक आंकड़ों, विभिन्न विश्वसनीय समाचार स्रोतों और जमीनी कृषि वास्तविकताओं के निष्पक्ष अध्ययन के आधार पर तैयार की गई है। इसका उद्देश्य नीतिगत निर्णयों और बाजार की स्थिति से किसानों को अवगत कराना है। इस विषय पर अपने क्षेत्र की स्थिति और विचार जरूर साझा करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1. वित्त वर्ष 2025-26 में भारत से कितने मखाने का निर्यात हुआ है?

उत्तर: केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार भारत ने 20 से अधिक देशों में 7,000 टन से अधिक मखाना और इसके मूल्यवर्धित उत्पादों का निर्यात किया है।

Q2. देश के कुल मखाना उत्पादन में बिहार की कितनी हिस्सेदारी है?

उत्तर: देश के कुल मखाना उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी लगभग 85% है, जिसमें मिथिला और सीमांचल क्षेत्र सबसे आगे हैं।

Q3. मखाना के लिए अलग हार्मोनाइज्ड सिस्टम (HS) कोड कब लागू किया गया?

उत्तर: केंद्र सरकार ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार और निर्यात आंकड़ों की सटीक निगरानी के लिए जुलाई 2025 में मखाना के लिए अलग एचएस कोड लागू किया।

Q4. मखाना विकास के लिए स्वीकृत केंद्रीय योजना का कुल बजट कितना है?

उत्तर: सरकार ने 2025-26 से 2030-31 तक के लिए ₹476.03 करोड़ की केंद्रीय योजना मंजूर की है, जिसमें 2026-27 के लिए ₹90 करोड़ का प्रावधान है।

Q5. राष्ट्रीय मखाना बोर्ड के गठन से किसानों को क्या फायदा होगा?

उत्तर: इस बोर्ड के माध्यम से किसानों को उन्नत किस्म के बीज, आधुनिक कटाई व प्रोसेसिंग मशीनें, गुणवत्ता नियंत्रण और अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग का सीधा लाभ मिलेगा।

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