मध्य प्रदेश के इंदौरी मालवी आलू को मिला प्रतिष्ठित GI टैग

मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध मालवी आलू को कृषि फसल श्रेणी में प्रतिष्ठित भौगोलिक संकेतक (जीआई टैग) प्राप्त हुआ है। इस मान्यता से आलू की बाजार में ब्रांड वैल्यू मजबूत होने के साथ-साथ किसानों को बेहतर मूल्य और नए वैश्विक बाजार मिलने की संभावना काफी बढ़ गई है। चेन्नई स्थित भौगोलिक संकेतक रजिस्ट्रार ने मालवी आलू के आधिकारिक जीआई पंजीकरण की अधिसूचना जारी कर दी है। इसके अलावा, इसकी खासियतों को देखते हुए केंद्र सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की ‘एक जिला-एक उत्पाद’ (ओडीओपी) पहल के तहत भी इसका विशेष चयन किया गया है।

मालवा क्षेत्र में व्यापक रूप से उगाया जाने वाला मालवी आलू अपने बेहतरीन पोषण गुणों और खाद्य प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) के लिए अत्यधिक उपयुक्त होने के कारण विशेष पहचान रखता है। इससे बनने वाले चिप्स और अन्य प्रसंस्कृत उत्पाद उद्योग जगत में बेहद पसंद किए जाते हैं। कृषि अधिकारियों के अनुसार, जीआई टैग मिलने से अब घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मालवी आलू की एक अलग और प्रामाणिक पहचान बनेगी।

इस कानूनी संरक्षण के बाद बाजार में नकली उत्पादों पर रोक लगेगी, जिससे स्थानीय किसानों को अपनी उपज की कहीं बेहतर और सही कीमत मिल सकेगी। यह मुख्य नकदी फसल मूल रूप से रबी मौसम के दौरान उगाई जाती है। पूरे मालवा बेल्ट में इंदौर के पास स्थित महू क्षेत्र इसके सबसे प्रमुख और अग्रणी उत्पादन केंद्रों में शामिल है, जहां का आलू अपनी खास गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध है। केवल इंदौर जिले में ही लगभग 45,000 हेक्टेयर क्षेत्र में आलू की बड़े पैमाने पर खेती की जाती है।

इस विस्तृत कृषि अभियान से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 30,000 से 35,000 किसान परिवारों की आजीविका सीधे जुड़ी हुई है। अधिकारियों और कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि जीआई टैग और ओडीओपी योजना का यह दोहरा लाभ मालवी आलू की खेती के रकबे को भविष्य में तेजी से बढ़ाएगा। इससे विदेशी बाजारों में निर्यात की संभावनाओं को बल मिलेगा और पूरे मालवा क्षेत्र में आलू की खेती की लाभप्रदता में बड़ा सुधार होगा।

निष्कर्ष: मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध ‘मालवी आलू’ को भौगोलिक संकेतक (GI टैग) और केंद्र सरकार की ‘एक जिला-एक उत्पाद’ (ODOP) पहल में शामिल होने का दोहरा गौरव प्राप्त हुआ है। अपने बेहतरीन पोषण और चिप्स जैसे खाद्य प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) के अनुकूल होने के कारण प्रसिद्ध इस नकदी फसल को अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक विशिष्ट पहचान और कानूनी सुरक्षा मिलेगी।

इस मान्यता से न केवल नकली उत्पादों पर रोक लगेगी और बाजार में मालवी आलू की ब्रांड वैल्यू मजबूत होगी, बल्कि इंदौर और मालवा क्षेत्र के लगभग 35,000 किसान परिवारों को उनकी उपज की बेहतर और सही कीमत मिलेगी, जिससे भविष्य में बड़े पैमाने पर निर्यात और ग्रामीण समृद्धि के नए रास्ते खुलेंगे।

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