मध्य प्रदेश में ग्रीष्मकालीन मूंग की रिकॉर्ड पैदावार के बाद किसानों की सबसे बड़ी मांग अब 100 प्रतिशत सरकारी खरीद की है। हाल ही में कृषि मंत्री द्वारा केंद्रीय कृषि मंत्री को भेजे गए पत्र में मूंग उपार्जन की लक्ष्य सीमा 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत करने का अनुरोध किया गया है। हालांकि किसान संगठनों और बड़ी संख्या में किसानों का कहना है कि यह बढ़ोतरी भी पर्याप्त नहीं है।
उनका कहना है कि जब उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर हुआ है, तो केवल 40 प्रतिशत खरीद से लाखों किसानों को अपनी उपज औने-पौने दामों पर व्यापारियों को बेचनी पड़ेगी। किसानों का कहना है कि यदि सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP पर पूरी मूंग खरीदने की व्यवस्था नहीं की, तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
कई क्षेत्रों में किसान पहले ही खाद की उपलब्धता, समय पर उपार्जन और भुगतान में देरी जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। ऐसे में यदि मूंग की खरीद भी सीमित रही, तो उनकी आर्थिक स्थिति और अधिक कमजोर हो सकती है। किसानों का कहना है कि सरकार को केवल लक्ष्य बढ़ाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जिससे हर पात्र किसान अपनी पूरी उपज समर्थन मूल्य पर बेच सके।
इससे किसानों को उचित मूल्य मिलेगा और उन्हें मजबूरी में कम कीमत पर फसल बेचने की नौबत नहीं आएगी। कई किसान यह भी मांग कर रहे हैं कि उपार्जन केंद्रों की संख्या बढ़ाई जाए, पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाया जाए और खरीदी के बाद भुगतान समय पर किसानों के बैंक खातों में पहुंचे। उनका कहना है कि यदि खरीद प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध होगी, तभी किसानों का सरकार पर भरोसा मजबूत होगा।
और हां यदि खेती लगातार घाटे का सौदा बनती गई, तो इसका असर केवल किसानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और बाजार पर भी पड़ेगा। इसलिए सरकार को किसानों की मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और ऐसा समाधान निकालना चाहिए जिससे किसान, उपभोक्ता और सरकार-तीनों का हित सुरक्षित रहे।
फिलहाल सरकार की ओर से 25 प्रतिशत से 40 प्रतिशत तक खरीद सीमा बढ़ाने का अनुरोध किया गया है। अब किसानों की नजर केंद्र सरकार के फैसले पर है। किसान उम्मीद कर रहे हैं कि उनकी मेहनत का उचित मूल्य सुनिश्चित करने के लिए खरीद व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा तथा उपार्जन, भुगतान और कृषि इनपुट की उपलब्धता से जुड़ी समस्याओं का भी स्थायी समाधान निकाला जाएगा।
निष्कर्ष: मध्य प्रदेश के मूंग किसानों की यह मांग केवल एक फसल के दाम की नहीं, बल्कि उनकी सालभर की आर्थिक रीढ़ से जुड़ी है। बम्पर पैदावार होने पर खरीद का लक्ष्य सीमित रखना सीधे तौर पर किसानों को खुले बाजार में व्यापारियों के रहमों-करम पर छोड़ देने जैसा है।
सरकार को खरीद सीमा बढ़ाने के साथ-साथ उपार्जन केंद्रों की व्यवस्था दुरुस्त करनी होगी और ‘समय पर भुगतान’ सुनिश्चित करना होगा। जब तक नीति निर्माता रिकॉर्ड उत्पादन को समस्या मानने के बजाय किसानों के लिए उत्सव नहीं बनाएंगे, तब तक ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आत्मनिर्भरता का सपना अधूरा ही रहेगा।
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