सरसों की खेती करने वाले किसानों के लिए एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। देश में सरसों की चार नई उन्नत किस्में विकसित की गई हैं, जो आने वाले समय में तेल उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। इन किस्मों को हरियाणा, पंजाब, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के कृषि वैज्ञानिकों की टीम ने विकसित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ये नई किस्में बदलते मौसम, कम पानी और प्रतिकूल परिस्थितियों में भी अच्छा उत्पादन देने की क्षमता रखती हैं।
आज के समय में खाद्य तेल की बढ़ती मांग को देखते हुए भारत में तिलहन उत्पादन बढ़ाना बहुत जरूरी हो गया है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए इन किस्मों को विकसित किया गया है ताकि देश को आत्मनिर्भर बनाया जा सके और किसानों को बेहतर दाम मिल सके। खास बात यह है कि इन नई किस्मों में तेल की मात्रा पारंपरिक किस्मों की तुलना में अधिक बताई जा रही है। जहां सामान्य किस्मों में लगभग 33 प्रतिशत तक तेल मिलता है, वहीं इन नई किस्मों से 39 से 41 प्रतिशत तक तेल प्राप्त किया जा सकता है। इससे किसानों को बाजार में अधिक लाभ मिलने की संभावना है।
इन उन्नत किस्मों की एक बड़ी विशेषता यह भी है कि ये रोग और कीटों के प्रति अधिक सहनशील मानी जा रही हैं। मौसम में अचानक बदलाव, गर्मी या ठंड के प्रभाव को सहन करने की क्षमता भी इनमें बेहतर बताई जा रही है। कम पानी की स्थिति में भी अच्छी पैदावार देना इनकी खास पहचान है। ऐसे क्षेत्रों के लिए यह किस्में काफी उपयोगी होंगी जहां सिंचाई की सुविधा सीमित है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इन किस्मों की खेती सही प्रबंधन और संतुलित पोषण के साथ की जाए तो प्रति हेक्टेयर उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। इसके साथ ही बीज की गुणवत्ता, समय पर बुवाई, उचित दूरी और पोषक तत्वों का संतुलन बनाए रखना बहुत जरूरी है। यदि किसान वैज्ञानिक तरीके से खेती करें तो उत्पादन लागत कम और मुनाफा ज्यादा हो सकता है।
आने वाले समय में तिलहन फसलों का महत्व और भी बढ़ने वाला है। इसलिए नई तकनीक, उन्नत किस्में और वैज्ञानिक खेती को अपनाना समय की मांग है। इससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी बल्कि देश की खाद्य तेल की जरूरत भी पूरी होगी।
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