धान की खेती में इस समय सबसे ज्यादा चर्चा जिस जैव उर्वरक की हो रही है, वह है माइकोराइजा (Mycorrhiza)। लेकिन अफसोस की बात यह है कि अधिकांश किसान इसे सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाते। कई बार दुकानदार यूरिया के साथ माइकोराइजा दे देता है और किसान दोनों को मिलाकर खेत में डाल देते हैं।
इसके बाद किसान कहते हैं कि माइकोराइजा से कोई फायदा नहीं हुआ। असल में समस्या उत्पाद में नहीं, बल्कि उसके उपयोग के तरीके में होती है। सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि माइकोराइजा कोई रासायनिक खाद नहीं है। यह एक लाभकारी जीवित फंगस (Beneficial Fungus) है, जो पौधों की जड़ों के साथ सहजीवी संबंध बनाता है।
यह जड़ों का प्रभावी क्षेत्र कई गुना बढ़ा देता है, जिससे पौधा मिट्टी से विशेष रूप से फास्फोरस (P), जिंक (Zn) और अन्य कम गतिशील पोषक तत्वों को अधिक कुशलता से अवशोषित कर पाता है। कई वैज्ञानिक अध्ययनों में पाया गया है कि माइकोराइजा जड़ों की कार्यक्षमता बढ़ाकर पौधे की पोषण क्षमता और सूखा सहन करने की शक्ति में भी सुधार कर सकता है। लेकिन इसका पूरा लाभ तभी मिलेगा जब इसे सही तरीके से उपयोग किया जाए।
पहली और सबसे बड़ी गलती– यूरिया के साथ मिलाकर डालना
सबसे आम गलती यही होती है कि किसान माइकोराइजा को यूरिया के साथ मिलाकर खेत में डाल देते हैं। जोकि ऐसा नहीं करना चाहिए। यूरिया एक रासायनिक उर्वरक है, जबकि माइकोराइजा एक जीवित सूक्ष्मजीव है। लंबे समय तक सीधे संपर्क में रहने या एक साथ मिलाने से इसकी जीवितता और सक्रियता प्रभावित हो सकती है।
इसलिए दोनों को अलग-अलग समय पर देना अधिक सुरक्षित और प्रभावी माना जाता है। यदि आपको दुकानदार ने यूरिया के साथ माइकोराइजा दिया है, तो दोनों को एक ही बोरी में मिलाकर खेत में न डालें।
दूसरी गलती- पानी भरे खेत में प्रयोग
माइकोराइजा को सक्रिय होने के लिए जड़ों के आसपास अनुकूल वातावरण चाहिए। यदि खेत में कई दिनों तक पानी भरा रहता है और ऑक्सीजन की कमी हो जाती है, तो माइकोराइजा का विकास प्रभावित हो सकता है।
इसलिए धान में इसका प्रयोग ऐसे समय करें जब खेत में केवल हल्की नमी हो या बहुत कम पानी हो। लगातार कई दिनों तक भरे हुए पानी में इसका प्रभाव कम हो सकता है।
तीसरी गलती– बहुत देर से उपयोग करना
कई किसान रोपाई के 40 से 50 दिन बाद माइकोराइजा डालते हैं। उस समय तक पौधे की अधिकांश जड़ें विकसित हो चुकी होती हैं और माइकोराइजा को जड़ों के साथ मजबूत संबंध बनाने का पर्याप्त अवसर नहीं मिलता।
सबसे अच्छा समय पौधे की शुरुआती वृद्धि अवस्था होती है। यदि धान की फसल है, तो पहली टॉप ड्रेसिंग या शुरुआती पोषण के लगभग 7 से 10 दिन बाद इसका प्रयोग करना अधिक लाभकारी माना जाता है।
चौथी गलती– फफूंदनाशी (Fungicide) के साथ मिलाना
यह भी एक बड़ी गलती है। माइकोराइजा स्वयं एक लाभकारी फंगस है, जबकि फफूंदनाशी का उद्देश्य फंगस को नियंत्रित या समाप्त करना होता है। यदि दोनों को एक साथ मिला दिया जाए तो फफूंदनाशी माइकोराइजा को भी नुकसान पहुंचा सकती है।
इसलिए यदि खेत में फफूंदनाशी का प्रयोग करना आवश्यक हो, तो माइकोराइजा और फफूंदनाशी के बीच कुछ दिनों का अंतर रखें। दोनों को एक साथ न मिलाएं।
कई विशेषज्ञ माइकोराइजा को अच्छी गुणवत्ता वाले वर्मी कम्पोस्ट या सड़ी हुई गोबर की खाद के साथ मिलाकर उपयोग करने की सलाह देते हैं। इससे सूक्ष्मजीवों को अनुकूल वातावरण मिलता है और उनका खेत में फैलाव बेहतर हो सकता है।
माइकोराइजा से क्या लाभ मिल सकते हैं?
यदि सही समय और सही तरीके से उपयोग किया जाए, तो माइकोराइजा से निम्न लाभ मिल सकते हैं- जड़ों का बेहतर विकास, फास्फोरस और जिंक की उपलब्धता में सुधार, पोषक तत्वों के अवशोषण की क्षमता बढ़ना, पौधों की शुरुआती बढ़वार में सहायता, सूखे की स्थिति में अपेक्षाकृत बेहतर सहनशीलता, लंबे समय में मिट्टी के जैविक स्वास्थ्य को समर्थन
ध्यान रखें कि इसका प्रभाव मिट्टी के प्रकार, नमी, तापमान, फसल और उत्पाद की गुणवत्ता पर भी निर्भर करता है। यह कोई जादुई उत्पाद नहीं है, बल्कि एक जैविक तकनीक है जिसे सही परिस्थितियों में उपयोग करने पर बेहतर परिणाम मिलते हैं। आपने अपनी धान या अन्य फसल में माइकोराइजा का प्रयोग किया है? आपका अनुभव कैसा रहा? कमेंट में जरूर बताइए ताकि दूसरे किसान भी आपके अनुभव से सीख सकें।
निष्कर्ष: धान की खेती में माइकोराइजा एक बेहद असरदार जैव उर्वरक (Bio-Fertilizer) है, जो पौधों की जड़ों का विकास कर मिट्टी से फास्फोरस और जिंक जैसे जरूरी पोषक तत्वों को सोखने में मदद करता है। हालांकि, रासायनिक खाद न होकर एक जीवित फंगस होने के कारण, इसका पूरा लाभ तभी मिलता है जब इसे सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए।
किसानों को इसे यूरिया या फफूंदनाशी (Fungicide) के साथ सीधे मिलाने, पानी से लबालब भरे खेतों में डालने और फसल चक्र में बहुत देर से उपयोग करने जैसी गलतियों से बचना चाहिए। बेहतर परिणामों के लिए माइकोराइजा को फसल की शुरुआती अवस्था (रोपाई के 7 से 10 दिन बाद) में, खेत में हल्की नमी होने पर, वर्मी कंपोस्ट या गोबर की खाद के साथ मिलाकर डालना सबसे प्रभावी और वैज्ञानिक तरीका है।
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मेरा नाम Anil Kumar Prasad है। मैं एक प्रगतिशील किसान हूं और पिछले 5 वर्षों से खेती की बारीकियों को धरातल पर सीख और समझ रहा हूं। ‘कृषि जागृति – चलो गांव की ओर’ के माध्यम से मैं अपने निजी अनुभव और खेती की सटीक जानकारी साझा करता हूं। मेरा उद्देश्य सरकारी योजनाओं, आधुनिक तकनीक और जैविक खेती के जरिए साथी किसानों को सशक्त बनाना है।
