ओडिशा: बरगढ़ में रबी धान खरीद शुरू

ओडिशा के बरगढ़ जिले में रबी धान की खरीद का आधिकारिक आगाज हो चुका है। प्रशासन ने मंडियों में आने वाली फसल की आवक को सुचारु रूप से संभालने के लिए इस बार चरणबद्ध प्रक्रिया अपनाई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, बरगढ़ जिले में अब तक 1,05,494 किसानों ने अपनी उपज बेचने के लिए पंजीकरण कराया है।

इनमें से 96,377 पात्र किसानों को टोकन जारी किए जा चुके हैं, जबकि शेष किसानों के लिए सत्यापन और टोकन वितरण का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। राज्य सरकार ने बरगढ़ के अलावा उन अन्य प्रमुख जिलों में भी अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं जहाँ 15 मई से खरीद प्रक्रिया शुरू होनी है। इन जिलों में बालासोर, कटक, पुरी और संबलपुर शामिल हैं।

बालासोर में 38,113 और पुरी में 22,236 किसानों ने पंजीकरण कराया है। वहीं संबलपुर में 19,113 और कटक में 3,518 किसान अपनी फसल बेचने के लिए तैयार हैं। भीषण गर्मी के प्रकोप और बेमौसम बारिश की संभावना को देखते हुए इस बार मंडियों में सुरक्षात्मक इंतजाम किए गए हैं। किसानों और उनकी फसल को धूप व बारिश से बचाने के लिए अस्थायी शेड बनाए गए हैं।

इसके अलावा पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है। सरकार ने पूरी व्यवस्था की देखरेख के लिए विशेष नोडल अधिकारियों की तैनाती भी की है।

किसानों के लिए सबसे बड़ी राहत की बात फसल की कीमत और भुगतान की गति है। सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य और इनपुट सब्सिडी को मिलाकर कुल 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की राशि निर्धारित की है।

भुगतान व्यवस्था को इतना सरल बनाया गया है कि धान की तुलाई के महज 48 घंटे के भीतर पूरी राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में पहुंच जाएगी। यह त्वरित भुगतान प्रणाली किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें अगली फसल की तैयारी में मदद करने के लिए शुरू की गई है।

निष्कर्ष: ओडिशा के बरगढ़ सहित अन्य प्रमुख जिलों में रबी धान की खरीद प्रक्रिया प्रशासन की सुचारु व्यवस्था, बेहतर सुरक्षात्मक इंतजामों और तकनीकी पारदर्शिता के साथ शुरू हो चुकी है। इस बार किसानों के लिए सबसे बड़ी राहत न्यूनतम समर्थन मूल्य और इनपुट सब्सिडी को मिलाकर मिलने वाली ₹3,100 प्रति क्विंटल की बेहतर कीमत है।

साथ ही, धान की तुलाई के महज 48 घंटे के भीतर सीधे बैंक खातों में भुगतान की त्वरित प्रणाली न केवल किसानों को आर्थिक संबल प्रदान करेगी, बल्कि उन्हें बिना किसी वित्तीय संकट के अगली फसल की तैयारी करने में भी सक्षम बनाएगी।

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