ओडिशा मत्स्य विभाग ने समुद्री मछली पकड़ने पर लगे 61 दिनों के प्रतिबंध से प्रभावित मछुआरों के लिए राहत सहायता की घोषणा की है। इस घोषणा के अनुसार लगभग 12,000 मछुआरों को उनके जीवनयापन के लिए मासिक आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।
मत्स्य विभाग के संयुक्त निदेशक रबी नारायण पटनायक ने बताया कि समुद्री मछली पकड़ने पर लगा प्रतिबंध 15 अप्रैल से 14 जून तक प्रभावी है। इस अवधि के दौरान पात्र मछुआरों को आजीविका सहायता योजना के तहत 1,500 रुपये प्रति माह की वित्तीय मदद दी जाएगी।
योजना के तहत 18 से 60 वर्ष की आयु के मछुआरों को अप्रैल, मई और जून के लिए तीन किश्तों में कुल 4,500 रुपये मिलेंगे। इस योजना के तहत लाभ केवल उन्हीं मछुआरों को मिलेगा जो “सेविंग-कम-रिलीफ योजना” के तहत पंजीकृत हैं।
पंजीकरण के अलावा एक और अनिवार्य शर्त यह है कि मछुआरे ने पिछले नौ महीनों में अपना 1,500 का अंशदान जमा किया हो। राज्य में कुल 1.5 लाख समुद्री मछुआरे हैं, लेकिन अंशदान की शर्त पूरी न होने के कारण केवल 12,000 ही इस सहायता के पात्र बन पाए हैं।
गौरतलब है कि सरकार द्वारा समुद्री जैव संसाधनों के संरक्षण के लिए समुद्री मछली पकड़ने पर 61 दिनों तक प्रतिबंध लगाया गया है। इस समय मछलियों का प्रजनन काल होता है, जिसे सुरक्षित बनाने के लिए यंत्रीकृत नौकाओं द्वारा मछली पकड़ने पर रोक रहती है। प्रतिबंध के चलते राज्य की करीब 6,000 यंत्रीकृत नावें, जिनमें 1,726 बड़े ट्रॉलर शामिल हैं।
वर्तमान में बंदरगाहों और घाटों पर खड़ी हैं। इससे मछली पकड़ने की गतिविधियां पूरी तरह से ठप हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि हालांकि इस प्रतिबंध से मछुआरों की आजीविका पर अस्थायी प्रभाव पड़ता है, लेकिन समुद्री मछली संसाधनों के लंबे समय तक बने रहने के लिए यह बेहद जरूरी है। ऐसे में सरकार की यह नकद सहायता उनके लिए एक बड़ा आर्थिक सहारा साबित होगी।
निष्कर्ष: ओडिशा सरकार द्वारा समुद्री मछली पकड़ने पर लगाए गए 61 दिनों के प्रतिबंध के दौरान मछुआरों को दी जाने वाली 4,500 रुपये की वित्तीय सहायता एक सराहनीय कदम है, जो पारिस्थितिक संरक्षण और मानवीय आजीविका के बीच संतुलन बनाने का प्रयास करता है।
हालांकि, यह योजना समुद्री जैव संसाधनों और मछलियों के प्रजनन काल की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है, लेकिन सख्त पंजीकरण और अंशदान शर्तों के कारण राज्य के 1.5 लाख मछुआरों में से केवल 12,000 ही इसका लाभ उठा पा रहे हैं।
कुल मिलाकर, यह सहायता प्रभावित पात्र मछुआरों को अस्थायी संकट से उबारने के लिए एक बड़ा आर्थिक सहारा है, लेकिन भविष्य में इसके दायरे को बढ़ाने की आवश्यकता भी रेखांकित होती है ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंदों को राहत मिल सके।
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