भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ लिमिटेड (नैफेड) ने ओडिशा के नयागढ़ जिले में ‘गोपालपुर फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी’ के माध्यम से मूंग की आधिकारिक खरीद प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस कदम से क्षेत्र के किसानों को अब अपनी मेहनत की उपज को बेचने के लिए भटकना नहीं पड़ेगा और उन्हें सीधे बड़े सरकारी बाजार से जुड़ने का मौका मिलेगा।
यह पूरी पहल मृदा संरक्षण एवं वाटरशेड निदेशालय तथा विश्व बैंक द्वारा समर्थित REWARD परियोजना के तहत संचालित की जा रही है। इस विशेष प्रोजेक्ट का कार्यान्वयन जीटी भारत एलएलपी की टीम द्वारा किया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य कृषि क्षेत्र में आधुनिक और संगठित विपणन प्रणालियों को बढ़ावा देना है।
इस सहयोग के जरिए किसानों को न केवल अपनी फसल का उचित मूल्य मिलेगा, बल्कि उनकी बाजार तक पहुंच भी पहले से कहीं अधिक सुगम होगी। अधिकारियों के अनुसार, इस पहल के तहत खरीदी गई मूंग की पूरी उपज सीधे नैफेड को उपलब्ध कराई जाएगी। यह संस्थागत जुड़ाव किसानों और बड़े खरीदारों के बीच के फासले को कम करने में मील का पत्थर साबित होगा।
इससे बिचौलियों का प्रभाव कम होगा और मूंग उत्पादकों को सीधे तौर पर आर्थिक लाभ पहुँचेगा। यह प्रयास किसानों को बेहतर वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में एक सशक्त कदम माना जा रहा है। नयागढ़ जिले में मूंग जैसी दलहन फसलों की खेती बड़े पैमाने पर होती है, लेकिन प्रभावी विपणन के अभाव में किसानों को अक्सर चुनौतियों का सामना करना पड़ता था।
REWARD परियोजना के तहत शुरू हुई इस खरीद प्रक्रिया से अब जिले के दलहन उत्पादकों के लिए संस्थागत विपणन के नए अवसर खुलेंगे। इससे न केवल स्थानीय कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, बल्कि किसानों का उत्साह भी बढ़ेगा, जिससे वे भविष्य में उन्नत खेती के लिए प्रेरित होंगे।
निष्कर्ष: ओडिशा के नयागढ़ में नैफेड और REWARD परियोजना के तहत शुरू की गई मूंग की यह सरकारी खरीद किसानों की आर्थिक उन्नति की दिशा में एक बेहद सराहनीय और दूरगामी कदम है। इस पहल ने न केवल बिचौलियों के चंगुल को खत्म कर किसानों को सीधे बड़े सरकारी बाजार से जोड़ा है।
बल्कि उन्हें उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाकर एक मजबूत वित्तीय सुरक्षा भी प्रदान की है। आधुनिक विपणन प्रणालियों और संस्थागत सहयोग के माध्यम से शुरू हुआ यह प्रयास नयागढ़ की स्थानीय कृषि अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा देगा, जिससे भविष्य में किसानों का मनोबल बढ़ेगा और वे अधिक उन्नत व संगठित खेती के लिए प्रेरित होंगे।
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