ओडिशा सरकार ने ‘ओडिशा मरीन फिशिंग रेगुलेशन बिल 2026’ को मंजूरी दे दी है, जो अब चार दशक पुराने 1982 के अधिनियम की जगह लेगा। इस नए कानून को गहरे समुद्र में मत्स्य पालन, समुद्री खाद्य निर्यात में वृद्धि और तटीय सुरक्षा को मजबूत करने के व्यापक उद्देश्यों के साथ तैयार किया गया है।
यह विधेयक न केवल मछली पकड़ने के पारंपरिक तरीकों को विनियमित करेगा, बल्कि आधुनिक मत्स्य अवसंरचना और सतत समुद्री प्रबंधन को भी शासन के दायरे में लेकर आएगा। नए कानून के तहत अब मछली पकड़ने वाली सभी नौकाओं में ट्रांसपोंडर, वीएचएफ रेडियो और वेसल ट्रैकिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य कर दिया गया है।
यह कदम न केवल अंतरराष्ट्रीय जल सीमा में विदेशी जहाजों की घुसपैठ को रोकेगा, बल्कि समुद्र में अचानक आने वाली आपदाओं के समय मछुआरों की सटीक स्थिति जानने में भी मदद करेगा। इसके साथ ही मछुआरों के लिए आधार से जुड़े बायोमेट्रिक या क्यूआर कोड आधारित पहचान पत्र और व्यापक बीमा कवरेज का प्रावधान किया गया है।
यह विधेयक ओडिशा को वर्ष 2036 तक 25,000 करोड़ रुपये के समुद्री खाद्य निर्यात लक्ष्य तक पहुँचाने का रोडमैप तैयार करता है। इसके लिए पारंपरिक मछली पकड़ने की गतिविधियों से आगे बढ़कर समुद्री केज कल्चर, समुद्री शैवाल की खेती और कृत्रिम रीफ स्थापना जैसी नवीन गतिविधियों को कानूनी मान्यता और प्रोत्साहन दिया जाएगा।
सरकार का मानना है कि फिशिंग हार्बर और मछली उतारने के केंद्रों के आधुनिकीकरण से राज्य में ब्लू इकोनॉमी का विस्तार होगा, जिससे तटीय क्षेत्रों में रोजगार के हजारों नए अवसर पैदा होंगे। गौरतलब है कि 575 किलोमीटर लंबी तटरेखा और लगभग 5.2 लाख मछुआरों की आबादी वाला ओडिशा पहले से ही मछली उत्पादन के मामले में देश में अग्रणी रहा है।
जहाँ वर्ष 2024-25 में 12 लाख टन उत्पादन दर्ज किया गया था। अब नए लाइसेंसिंग नियमों और अवैध मत्स्य गतिविधियों पर कड़े प्रतिबंधों के माध्यम से सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि समुद्री संसाधनों का दोहन सतत और वैज्ञानिक तरीके से हो, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी समुद्र की उर्वरता बनी रहे।
निष्कर्ष: ‘ओडिशा मरीन फिशिंग रेगुलेशन बिल 2026’ राज्य के तटीय विकास और मत्स्य पालन क्षेत्र में एक युगांतरकारी कदम है, जो पुराने कानूनों को आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप बदलता है।
यह विधेयक वेसल ट्रैकिंग सिस्टम और बायोमेट्रिक पहचान पत्र जैसी उन्नत तकनीकों के माध्यम से तटीय सुरक्षा और मछुआरों की सुरक्षा को सुदृढ़ करता है, तो दूसरी ओर केज कल्चर और समुद्री शैवाल की खेती जैसी नवीन पहलों से ‘ब्लू इकोनॉमी’ (नीली अर्थव्यवस्था) को नया विस्तार देता है।
कुल मिलाकर, यह कानून कड़े नियमों और आधुनिकीकरण के बीच संतुलन बनाकर ओडिशा के संसाधनों का वैज्ञानिक व सतत दोहन सुनिश्चित करेगा, जिससे राज्य को वर्ष 2036 तक 25,000 करोड़ रुपये के समुद्री खाद्य निर्यात लक्ष्य को हासिल करने और तटीय क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित करने में मदद मिलेगी।
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