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जीएम सोयाखली आयात पर सोपा ने सरकार से कहा- ‘विदेशी सोयाबीन से बर्बाद हो जाएंगे किसान..!

11/02/2026 by krishijagriti5

सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया यानी सोपा ने केंद्र सरकार से आनुवंशिक रूप से संशोधित जीएम सोयाबीन खली के आयात की अनुमति न देने की अपील की है। एसोसिएशन का तर्क है कि देश में सोयाखली की पर्याप्त उपलब्धता है और आयात से लाखों सोयाबीन किसानों के हित प्रभावित हो सकते हैं।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को भेजे ज्ञापन में सोपा ने कहा कि पोल्ट्री उद्योग द्वारा ऊंची घरेलू कीमतों का हवाला देकर आयात की मांग करना मौजूदा बाजार स्थिति की अनदेखी है। इंदौर में सोयाबीन का भाव 31 जनवरी को 56,900 रुपय प्रति टन तक पहुंच गया, जो अप्रैल 2025 में 46,000 रुपय प्रति टन था। इसी अवधि में सोयाखली की कीमत 32,713 रुपय से बढ़कर 43,872 रुपय प्रति टन हो गई।

सोपा ने स्पष्ट किया कि सोयाखली की कीमतें बाजार आधारित हैं, क्योंकि कच्चे सोयाबीन की लागत कुल उत्पादन खर्च का लगभग 96 प्रतिशत होती है। प्लांट डिलीवरी पर सोयाबीन का भाव 54,900 रुपय प्रति टन और प्रसंस्करण लागत करीब 2,000 रुपय प्रति टन रहने से कीमतें अंतरराष्ट्रीय खाद्य तेल बाजार से भी प्रभावित होती हैं।

तेल विपणन वर्ष 2025-26 के लिए सोपा ने 117.02 लाख टन सोयाबीन उपलब्धता का अनुमान जताया है, जबकि कुल खपत और निर्यात 114 लाख टन रहने की संभावना है। इसके बाद लगभग 3 लाख टन का स्टॉक शेष रहेगा। एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि जीएम सोयाखली आयात से देश खाद्य तेल की तरह दीर्घकालिक आयात निर्भरता की ओर बढ़ सकता है।

गौरतलब है कि भारत में जीएम फसलों के व्यावसायिक उत्पादन की अनुमति नहीं है। ऐसे में सोपा का तर्क है कि जब हमारे किसान बिना जीएम वाली उच्च गुणवत्ता वाली सोयाबीन उगा रहे हैं, तो बाहर से विवादित जीएम सोयाखली मंगाकर घरेलू बाजार को क्यों बिगाड़ा जा रहा है? विशेषज्ञों का कहना है कि सस्ता आयात पोल्ट्री और फीड इंडस्ट्री को तो फायदा पहुंचा सकता है, लेकिन यह करोड़ों सोयाबीन किसानों की कमर तोड़ देगा।

यह भी पढ़े: चीनी बाजार में वैश्विक उथल-पुथल: पीयूष गोयल का बड़ा बयान, क्या सुरक्षित रहेंगे भारतीय किसान..!

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Filed Under: कृषि समाचार Tagged With: Agri Market News, GM Soybean Import, Indian Farmers

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