खरपतवारनाशी पैराक्वाट डाइक्लोराइड पर देशभर में लगेगा प्रतिबंध, केंद्र सरकार ने जारी की अधिसूचना; जानें मुख्य वजह

केंद्र सरकार ने देश में व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाले खरपतवारनाशी पैराक्वाट डाइक्लोराइड पर प्रतिबंध लगाने की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों और इससे जुड़े अनेक घातक विषाक्तता मामलों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।

30 दिनों के भीतर आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित

केंद्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा जारी राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, इस प्रस्तावित प्रतिबंध को लेकर सभी हितधारकों से 30 दिनों के भीतर आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। इन सुझावों की समीक्षा के बाद सरकार द्वारा इस पर अंतिम अधिसूचना जारी की जाएगी। यह निर्णय कीटनाशक अधिनियम, 1968 के तहत गठित विशेषज्ञ समिति और पंजीकरण समिति की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है।

70 से अधिक देशों में पहले से ही है प्रतिबंधित

समिति ने रेखांकित किया है कि दुनिया के 70 से अधिक देशों में इस खरपतवारनाशी पर पहले से ही प्रतिबंध है। इसके गंभीर स्वास्थ्य दुष्प्रभावों, बार-बार सामने आए विषाक्तता के मामलों, उच्च मृत्यु दर और इसके इलाज के लिए किसी विशेष प्रतिविष (एंटीडोट) के अभाव को देखते हुए इसे प्रतिबंधित करने की सिफारिश की गई थी।

प्रतिबंध लागू होने के बाद किन चीजों पर रुकेगी गतिविधि?

इस प्रतिबंध के पूर्ण रूप से लागू होने के बाद, देश भर में पैराक्वाट डाइक्लोराइड के निर्माण, आयात, परिवहन, वितरण, बिक्री और कृषि में इसके उपयोग पर पूरी तरह से रोक लग जाएगी। इसका मुख्य उद्देश्य मानव और पशु स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा भविष्य में होने वाली विषाक्तता की घटनाओं को रोकना है।

तेलंगाना सरकार की अपील और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि इससे पहले 3 अप्रैल को तेलंगाना सरकार ने पैराक्वाट विषाक्तता से जुड़ी 200 से अधिक मौतों (जिनमें अधिकांश आत्महत्या के मामले थे) के बाद इस पर तीन महीने का अस्थायी प्रतिबंध लगाया था। इसके साथ ही तेलंगाना विधानसभा ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से इसे देश भर में प्रतिबंधित करने की अपील की थी।

निष्कर्ष: पैराक्वाट डाइक्लोराइड पर प्रतिबंध लगाने का केंद्र सरकार का यह फैसला भारतीय कृषि को अधिक सुरक्षित और मानवीय बनाने की दिशा में एक सराहनीय कदम है। हालांकि यह रासायनिक खरपतवार नियंत्रण पर निर्भर किसानों के लिए शुरुआती चुनौती खड़ी कर सकता है, लेकिन मानव जीवन और पशु स्वास्थ्य की सुरक्षा के सामने यह कदम बेहद अनिवार्य था।

अब समय आ गया है कि किसान भाई और कृषि वैज्ञानिक मिलकर इसके सुरक्षित, जैविक और वैकल्पिक तरीकों पर ध्यान केंद्रित करें। सुरक्षित कृषि प्रबंधन ही आने वाले समय में खेती को टिकाऊ और मुनाफे का सौदा बनाएगा।

Frequently Asked Questions (FAQ)

Q. पैराक्वाट डाइक्लोराइड (Paraquat Dichloride) पर प्रतिबंध क्यों लगाया जा रहा है?

Ans. इस खरपतवारनाशी के कारण गंभीर स्वास्थ्य जोखिम, उच्च मृत्यु दर और बार-बार सामने आने वाले विषाक्तता के मामलों को देखते हुए प्रतिबंध लगाया जा रहा है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इसके जहर के इलाज के लिए कोई विशेष प्रतिविष (एंटीडोट) उपलब्ध नहीं है।

Q. सरकार द्वारा जारी इस अधिसूचना के बाद आगे की क्या प्रक्रिया होगी?

Ans. केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर सभी हितधारकों और आम जनता से 30 दिनों के भीतर आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं। इन सभी सुझावों की गहन समीक्षा करने के बाद सरकार इस प्रतिबंध पर अपनी अंतिम अधिसूचना जारी करेगी।

Q. प्रतिबंध पूरी तरह लागू होने के बाद क्या बदलाव आएंगे?

Ans. इस प्रतिबंध के पूर्ण रूप से लागू होने के बाद पूरे भारत में पैराक्वाट डाइक्लोराइड के निर्माण (मैन्युफैक्चरिंग), आयात, परिवहन, बिक्री, वितरण और खेती में इसके किसी भी प्रकार के उपयोग पर कानूनी रूप से पूरी तरह से रोक लग जाएगी।

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